नई दिल्ली :- हिंदू धर्म में नवरात्रि का महत्व होता है जिसमें शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि दोनों बेहद खास होती है। इस दौरान माता दुर्गा के भक्त भक्तिभाव के साथ आराधना करने के साथ ही रात्रि के समय में गरबा और डांडिया जमकर खेल जाता है। जहां पर 3 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होने वाली है जो दशहरा के दिन 12 अक्टूबर को खत्म हो जाएगी।
गुजरात में गरबा और डांडिया का सबसे ज्यादा महत्व होता है तो वहीं पर पश्चिम बंगाल में अष्टमी पूजा का सबसे खास महत्व होता है। चलिए जानते हैं लोगों के बीच फेमस गरबा और डांडिया के शुरू होने का इतिहास।
गरबा-डांडिया के लिए फेमस है गुजरात
शारदीय नवरात्रि के दौरान गरबा-डांडिया खेलने का महत्व होता है जिसके लिए गुजरात राज्य काफी प्रसिद्ध है। यहां पर गुजरात की संस्कृति का हिस्सा होने के साथ ही गुजरातियों में सबसे फेमस भी माना जाता है। गुजरात में एक महीने पहले ही गरबा और डांडिया के लिए तैयारियां औऱ प्रेक्टिस होने लगती है। इस मौके पर रंग-बिरंगी गरबा की पोशाकें हर किसी को बड़ी ही पसंद आती है। इसमें हर को कोई बडे़ ही शानदार नजर आते है। गरबा की शुरुआत प्राचीन काल में की गई थी जो अब प्रथा बन गई है।
जानिए गरबा और डांडिया के बीच का अंतर
यहां पर गरबा और डांडिया के बीच का अंतर काफी अलग है जिसके बारे में चलिए जानते है।
गरबा-
गरबा का डांस शुरु करने से पहले पहले मां दुर्गा की पूजा की जाती है. इसके बाद मां दुर्गा के सामने महिलाएं मिट्टी के कलश में छेद करती हैं और उसमें दीया जलाती हैं. इसके बाद इसमें चांदी का सिक्का डाला जाता है. इसके बाद उसी दीए की रोशनी में इस नृत्य को धीरे-धीरे किया जाता है. इसमें पुरुष और महिलाएं ग्रुप बनाकर डांस करते हैं। यहां पर खास मौके पर गरबा की ड्रेस पहनकर डांस को सही तरीके से किया जा सकता है।
डांडिया
यहां पर आप गरबा के अलावा डांडिया भी खेल सकते है जिसे और भी उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसमें छोटी-छोटी रंग-बिरंगी सजी हुई डंडियों का इस्तेमाल करते हैं. ढोल-नगाड़े और तबले का भी इस्तेमाल किया जाता है. छोटी डंडियों से उत्पन्न होने वाली आवाज लोगों के मन में और उमंग पैदा करती है और माहौल भी सकारात्मक हो जाता है।
