
प्रशासन ने पखवाड़े भर पहले सीएसईबी चाैक से बुधवारी की ओर भारी वाहनाें के लिए पूरी तरह नाे एंट्री लगा दी थी, जिसके बाद शहर से उरगा हाेकर गंतव्य की ओर आवाजाही करने वाले मालवाहक सीएसईबी चाैक से फाेरलेन-बालकाे हाेते गुजर रहे हैं। इससे भले ही बुधवारी समेत रिकांडाे राेड की ओर लाेगाें काे भारी वाहनाें से राहत मिली है, लेकिन ट्रांसपाेर्टराें काे प्रति ट्रिप ढाई हजार रुपए तक नुकसान उठाना पड़ रहा है। आर्थिक तंगी के बीच ट्रांसपाेर्टर नई व्यवस्था से परेशान हैं।
दरअसल, भारी वाहनाें से दर्री बराॅज पुल पर खतरे काे देखते हुए रूट डाइवर्ट करने की मांग के बाद प्रशासन ने नई व्यवस्था बनाई। इसमें काेयलांचल की ओर से शहर हाेकर उरगा की ओर आवाजाही करने वाले भारी वाहनाें का रूट बदल दिया गया। सीएसईबी चाैक से बुधवारी की ओर भारी वाहनाें की आवाजाही पर पूरी तरह नाे एंट्री लगा दी गई। वहीं एेसे वाहनाें काे सीएसईबी चाैक से फाेरलेन हाेकर मेजर ध्यानचंद चाैक गुजारने का आदेश दिया गया।
पखवाड़े भर से इस व्यवस्था से भारी वाहन आवाजाही कर रहे हैं। ट्रांसपाेर्टराें काे उम्मीद थी कि नवरात्र-दशहरा के बाद व्यवस्था बदलते हुए नाे एंट्री हटा दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब ट्रांसपाेर्टराें काे प्रति ट्रिप आवाजाही में वाहन पीछे ढाई हजार रुपए का अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ रहा है। इसके अलावा बालकाे क्षेत्र में रूमगरा की ओर 3 किमी तक सड़क पर गड्ढे हाेने से वाहन डैमेज हाे रहे हैं। वाहनाें का फेरा भी पहले से कम हाे गया है। मंहगाई के दाैर में ट्रांसपाेर्टराें काे भाड़ा यथावत रखने के दबाव के बीच अतिरिक्त नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पब्लिक काे फायदा नहीं ट्रांसपाेर्ट व्यवसाय काे नुकसान
गुड्स ट्रांसपाेर्ट एसाेसिएशन के राजेंद्र तिवारी ने बताया सीएसईबी चाैक से बुधवारी-रिकांडाे राेड की ओर पहले भीड़ के समय में नाे एंट्री लगती थी, जिसमें सिर्फ दाेपहर में छूट थी। रात भर आवाजाही के लिए माैका मिलता था। सीएसईबी चाैक पर ट्रैफिक सिग्नल के हिसाब से भारी वाहन आगे बढ़ते थे, इसलिए बुधवारी की ओर दबाव नहीं रहता था। पूरी तरह नाे एंट्री लगने से पब्लिक काे ज्यादा फायदा नहीं है, लेकिन ट्रांसपाेर्ट व्यवसाय काे नुकसान हाे रहा है।
सीएसईबी चाैक से बरबसपुर जाने में 15 किमी ज्यादा सफर
सीएसईबी चाैक से उरगा हाेते हाटी-चांपा से जाने वाले भारी वाहनाें के लिए पहले दाेपहर 1 से 5 बजे सीएसईबी चाैक पर नाे एंट्री खुलती थी। रात में 10 से सुबह 7 बजे तक नाे एंट्री में छूट थी। इस दाैरान वाहन सीएसईबी चाैक से बरबसपुर हाेते उरगा पहुंचते थे। अब सीएसईबी चाैक से फाेरलेन हाेते मेजर ध्यानचंद चाैक व बालकाे नगर हाेते भारी वाहन बरबसपुर पहुंच रहे हैं। एक दिशा में 15 किमी ज्यादा सफर करना पड़ रहा है। वापसी काे जाेड़ें ताे यह दूरी 30 किमी हाे जाती है।
डीजल 101 रुपए लीटर, 1 दिशा में 12 लीटर अतिरिक्त खपत
ट्रंासपोर्टरों के मुताबिक मालभाड़ा में बढ़ाेतरी नहीं हुई है, जबकि डीजल की कीमत बढ़ गई। डीजल की कीमत 101 रुपए लीटर है। सीएसईबी चाैक से बालकाे हाेते बरबसपुर जाने में 15 किमी ज्यादा दूरी तय करने में करीब 12 लीटर अतिरिक्त डीजल खर्च हाे रहा है, क्याेंकि रूमगरा की ओर सड़क भी खराब है। एक दिशा में करीब साढ़े 12 साै रुपए अतिरिक्त वहन करना पड़ रहा है। आवाजाही के ट्रिप काे जाेड़ दें ताे यह खर्च करीब ढाई हजार रुपए हाे जाता है।
वाहनाें के दबाव के साथ बालकाेनगर की सड़क पर बढ़ा दुर्घटना का खतरा
शहर से भारी वाहनाें के लिए रूट डाइवर्ट करने से अब 1 हजार से अधिक वाहनाें का अतिरिक्त दबाव बालकाेनगर की सड़क पर बढ़ गया है। पहले ही बालकाे प्लांट के लिए काेयला परिवहन व बालकाे व बिजली कंपनी के डैम से राखड़ परिवहन में जुड़े करीब 500 वाहनाें का दबाव था। बालकाेनगर के परसाभाठा क्षेत्र से रिस्दा तक जाम की स्थिति रहती है। नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष हितानंद अग्रवाल ने कहा दबाव बढ़ने से सड़क दुर्घटना का खतरा बढ़ा है।