नई दिल्ली:- सनातन शास्त्रों में गोवर्धन पूजा का विशेष उल्लेख देखने को मिलता है। हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गोवर्धन पूजा मनाई जाती है। इसके एक दिन बाद भाई दूज होती है। गोवर्धन पूजा के दिन विधिपूर्वक जगत के पालनहार भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही उनको प्रिय भोग अर्पित किए जाते हैं। धार्मिक मत है कि प्रिय भोग अर्पित करने से साधक को सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। साथ ही जीवन में खुशियों का आगमन होता है। अगर आप भी भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो पूजा थाली में भोग शामिल करें। इससे पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
गोवर्धन पूजा 2024 डेट और टाइम
पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 01 नवंबर को शाम 06 बजकर 16 मिनट से होगी। वहीं, इसका समापन 02 नवंबर को रात 08 बजकर 21 मिनट पर होगा। ऐसे में गोवर्धन पूजा का त्योहार 02 नवंबर को मनाया जाएगा।
गोवर्धन पूजा के भोग
यदि आप गोवर्धन पूजा के दिन पर भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो पूजा थाली में माखन मिश्री जरूर शामिल करें। धार्मिक मत है कि माखन मिश्री का भोग लगाने से जातक के जीवन में खुशियों का आगमन होता है।
भोग के लिए कढ़ी चावल और अन्नकूट भी बना सकते हैं। ऐसी मान्यता है कि कढ़ी चावल और अन्नकूट का भोग लगाने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है। साथ ही भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं।
इसके अलावा भगवान श्रीकृष्ण को खीर, रसगुल्ला, जलेबी, रबड़ी, जीरा-लड्डू, मालपुआ का भोग लगा सकते हैं। इन चीजों का भोग लगाने से साधक की सभी मुरादें पूरी होती हैं।
साथ ही पेड़ा, काजू-बादाम बर्फी, पिस्ता बर्फी, पंचामृत, गोघृत, शक्कर पारा, मठरी समेत आदि चीजों को भोग लगाना कल्याणकारी माना जाता है।
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गोवर्धन पूजा के दिन भगवान श्रीकृष्ण को भोग अर्पित करते समय निम्न मंत्र का जप करें। इस मंत्र के जप के बिना भगवान श्रीकृष्ण भोग स्वीकार नहीं करते हैं।
त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये।
गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर ।।
इस मंत्र का अर्थ यह है कि हे प्रभु जो भी मेरे पास है। वो आपका ही दिया हुआ है। जो आपको ही अर्पित कर रहे हैं। कृपा करके मेरे इस भोग को आप स्वीकार करें।
