मध्यप्रदेश:– देश के प्रतिष्ठापूर्ण सात दिवसीय अखिल भारतीय कालिदास समारोह का शुभारंभ देव प्रबोधिनी एकादशी 12 नवंबर को दोपहर 3.30 बजे कालिदास संस्कृत अकादमी में होगा। मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ होंगे। वे 40 मिनट समारोह में रहेंगे। तीन मिनट में आठ कलाकारों को राष्ट्रीय कालिदास सम्मान और दो कलाकारों को श्रेष्ठ कृति अलंकरण से सम्मानित करेंगे।
यहीं लगी राष्ट्रीय कालिदास चित्र एवं मूर्तिकला प्रदर्शनी का शुभारंभ भी करेंगे। समारोह के सारस्वत अतिथि अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविन्द देव गिरी होंगे। अध्यक्षता राज्यपाल मंगु भाई पटेल करेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, धर्मस्व विभाग के राज्यमंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, जिले के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल विशेष रूप से शामिल होंगे। सांस्कृतिक संध्या में पहले दिन शाम 7 बजे मुक्ताकाश मंच पर हिमांशु द्विवेदी के निर्देशन में तैयार संस्कृत नाटक ‘कालिदासमहोत्साहम’ का मंचन राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के विद्यार्थी करेंगे। इंदौर की पल्लवी व्यास लोक गायन करेंगी।
तय कार्यक्रम अनुसार उपराष्ट्रपति हेलीकॉप्टर से दोपहर 3.20 बजे उज्जैन आएंगे और शाम 4.10 बजे रवाना हो जाएंगे। यानी उज्जैन में वे सिर्फ 50 मिनट रहेंगे।
ये पाएंगे राष्ट्रीय कालिदास सम्मान
शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में वर्ष 2022 का सम्मान पुणे के गायक पंडित उदय भवालकर, वर्ष 2023 का सम्मान मुंबई के सितार वादक पंडित अरविंद पारिख।
शास्त्रीय नृत्य के क्षेत्र में वर्ष 2022 का सम्मान मुंबई की भरतनाट्यम नृत्यांगना डा. संध्या पुरेचा, वर्ष 2023 का सम्मान मणिपुर की मणिपुरी नृत्यांगना गुरु कलावती देवी।
रूपंकर कला क्षेत्र में वर्ष 2022 का सम्मान दिल्ली के मूर्तिकार पीआर दारोज, वर्ष 2023 का सम्मान मैसूर के चित्रकार रघुपति भट्ट।
रंगकर्म के क्षेत्र में वर्ष 2022 का सम्मान राजस्थान के भानु भारती, वर्ष 2023 का सम्मान कोलकाता के रुद्रप्रसाद सेन गुप्ता।
राष्ट्रीय कालिदास श्रेष्ठ कृति अलंकरण इंदौर के आचार्य मिथिलाप्रसाद त्रिपाठी और प्रादेशिक भोज श्रेष्ठ कृति अलंकरण ग्वालियर के आचार्य बालकृष्ण शर्मा पाएंगे।
मैथिली के भजनों से गूंजा कालिदास का आंगन
शुभारंभ समारोह की पूर्व संध्या में कालिदास संस्कृत अकादमी का आंगन शंख, शहनाई और पखावज की धुन और मैथिली ठाकुर के राग-अलाप से गुंजायमान हुआ। नांदी कार्यक्रम अंतर्गत इंदौर के दिव्येश कुमार गोस्वामी ने पखावज, पुणे के मधुकर शिधये ने शंख और बुरहानपुर के गजानन वारुडे ने शहनाई वादन किया। नई दिल्ली की मैथिली ठाकुर ने भगवान शिव और राम पर आधारित कई भजनों की प्रस्तुति दी।
