सरगुजा :- देश और प्रदेश में चल रही नेशनल रूरल लाईवलीहुड मिशन की योजना धीरे-धीरे कमाल कर रही है. इस योजना से ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल रही है. वनांचल में रहने वाली ग्रामीण आदिवासी महिला अब मेट्रो सिटी के जैसी वर्किंग वूमेन बन रही है. भले ही ये महिलाएं कम पढ़ी लिखी है. लेकिन इन्होंने स्वरोजगार से पैसे कमाएं और पैसों से ना सिर्फ अपने जीवन को बेहतर बनाया बल्कि आगे की पढ़ाई भी पूरी की. अब ऐसी कई कहानियां सरगुजा जैसे वनांचल से सामने आती है.ऐसी ही एक कहानी है सुषमा सिंह की.
छोटे से गांव की लखपति महिला : सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड का गांव अमगसी है. इस गांव में रहने वाली एक आदिवासी महिला सुषमा आत्मनिर्भर और लखपति बन चुकी है. बिहान योजना के तहत सुषमा महिला समूह से जुड़ी और कई तरह की एक्टिविटी शुरु की. सुषमा और उसके पति दोनों ही इस योजना में काम भी करते हैं. जिसके लिए उन्हें 5-5 हजार प्रति माह मानदेय भी मिलता है. सुषमा बकरी पालन, मुर्गी पलान, मछली पालन करती है. खेती का ये तरीका इतना उन्नत है इससे सिर्फ फायदा होता है नुकसान नहीं
क्यों हुआ सुषमा को फायदा : इस अनोखी खेती में फायदा अधिक इसलिए होता है क्योंकि प्रशासन के नवाचार का सही उपयोग सुषमा जैसे कृषक कर रहे हैं. बकरी पालन में उसने सिरोही नस्ल का पालन किया है जिसका वजन करीब 50 से 60 किलो तक होता है. वहीं मुर्गी पालन में भी सुषमा ने विशेष नस्ल की मुर्गियां पाली हैं. एक एक मुर्गी का वजन 20 से 21 किलो तक होता है. वहीं बायलर मुर्गा और मछली पालन से भी सुषमा को मुनाफा होता है.सुषमा के मुताबिक उसे साल में तीन लाख तक का मुनाफा होता है.
सुषमा के जीवन से अब आर्थिक मजबूरियां दूर हो चुकी है. दसवीं फेल होने के बाद सुषमा ने पढ़ाई छोड़ दी थी. शादी के बाद घर वालों ने भी साथ नहीं दिया. पति के साथ अकेले संघर्ष कर रही थी. लेकिन बिहान से जुड़ने के बाद सुषमा ने ना सिर्फ बारहवीं तक पढ़ाई पूरी की,बल्कि अब सीएलएफ में लेखापाल की जिम्मेदारी उठा रही हैं.