नई दिल्ली:– करीब 161 वर्ष पहले बने मंदिर के जिस गर्भगृह में ठाकुर बांकेबिहारी भक्तों को दर्शन दे रहे हैं, अब मंदिर की दीवारें और फर्श कमजोर होने लगे हैं। गर्भगृह की सुरक्षा को देख सेवायतों ने मंदिर प्रशासक से इसके जीर्णोद्धार की मांग की थी।
अब इसकी प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने वाली है। गर्भगृह के जीर्णोद्धार के लिए सेवायतों से 29 फरवरी तक सुझाव मांगे गए हैं। इसके बाद इस पर काम शुरू होगा।
क्यों कमजोर हो रहा गर्भगृह का फर्श
मंदिर का निर्माण वर्ष 1864 में हुआ था। इसके बाद से ही ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में भक्तों को दर्शन दे रहे हैं। मंदिर परिसर की साफ-सफाई और धुलाई तो दिन में दो बार होती है, लेकिन गर्भगृह में चार बार धुलाई होती है। संगमरमर के फर्श पर जब लगातार पानी गिरता है तो फर्श भी कमजोर हो रहा है।
यही कारण है कि मंदिर के अंदर गर्भगृह में सेवा पूजा करने वाले सेवायतों में गर्भगृह की हालत को लेकर चिंता होने लगी और मंदिर प्रशासक सिविल जज को जीर्णोद्धार के साथ पत्थरों की मरम्मत का काम कराने के लिए प्रार्थनापत्र दिया गया था। सेवायतों के इसी प्रार्थनापत्र पर अमल करते हुए मंदिर प्रशासक ने अब गर्भगृह के जीर्णोद्धार कराने की प्रक्रिया में सेवायतों से सुझाव मांगे हैं।
गर्भगृह में दर्शन नहीं दे सकेंगे, इसलिए सेवातयों का मनाना है कि गर्भगृह के जीर्णोद्धार की प्रक्रिया गर्मी में सजने वाले फूलबंगला के दिनों में संभव हो सकेगी। इन दिनों में ठाकुरजी जगमोहन में विराजमान होकर सुबह और शाम भक्तों को दर्शन देते हैं तो किसी तरह की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।
कोविडकाल में प्रांगण में फर्श कराया था दोबारा तैयार
डेढ़ सौ वर्ष से पहले बने मंदिर के प्रांगण में चार साल पहले गड्ढे होने लग गए थे और टाइलों के अंदर खोखली हो रही थी। यही कारण है कि कोविडकाल में जब लाकडाउन में मंदिर सेवायतों के दर्शन के लिए बंद रखा तो प्रांगण को दोबारा बनवाया गया।
मंदिर की इमारत पुरानी हो चुकी है
सेवायत रजत गोस्वामी ने बताया कि मंदिर की इमारत पुरानी हो चुकी है। गर्भगृह का फर्श संगमरमर का बना है और दिन में चार बार इसकी धुलाई होती है। पानी गिरने से संगमरमर की टाइल कमजोर हो रही हैं। काफी पहले गर्भगृह के जीर्णोद्धार का प्रार्थनापत्र दिया था। इसी संबंध में अब सेवायतों के सुझाव मांगे जा रहे हैं।
प्रबंधक मुनीश शर्मा ने बताया कि अभी मंदिर के गर्भगृह के जीर्णोद्धार की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है, फिलहाल सेवायतों से सुझाव मांगे जा रहे हैं कि जीर्णोद्धार की प्रक्रिया किस तरह शुरू कराई जाए। सभी सहमत होंगे, तभी प्रक्रिया आगे बढ़़ेगी।
