मुंबई:- सरकार सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर वस्तु एवं सेवा कर बढ़ा सकती है. यह बदलाव तब हो सकता है जब सरकार इन उत्पादों पर मुआवजा उपकर लगाना बंद कर दे. इस खबर के बाद आज तंबाकू के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार उत्पादों पर मुआवजा सेस हटाए जाने के बाद लागू की जाएगी.
फिलहाल सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पादों पर 28 फीसदी जीएसटी के साथ-साथ कई अन्य शुल्क भी लगते हैं, जिससे कुल कर का बोझ 53 फीसदी हो जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक अब जीएसटी को बढ़ाकर 40 फीसदी करना है और उसके ऊपर उत्पाद शुल्क जोड़ना है.
इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मार्च 2026 में मुआवजा सेस समाप्त होने के बाद तंबाकू उत्पादों से टैक्स राजस्व में कमी न आए. अधिकारियों ने ईटी को बताया कि सरकार मौजूदा उपकर की जगह नया उपकर नहीं लगाना चाहती है.
शेयरों पर दिखा असर
आईटीसी, गॉडफ्रे फिलिप्स और वीएसटी इंडस्ट्रीज के शेयरों में काफी गिरावट आई. आईटीसी का शेयर 1.6 फीसदी गिरकर 400 रुपये पर आ गया, जबकि गॉडफ्रे फिलिप्स 3 फीसदी गिरकर 6,364.4 रुपये पर आ गया और वीएसटी इंडस्ट्रीज का शेयर 3.7 फीसदी गिरकर 288.3 रुपये प्रति शेयर पर आ गया.
क्यों बढ़ाया जा रहा है तम्बाकू की कीमत
तम्बाकू उत्पादों को सीन प्रोडक्ट माना जाता है, जिसका मतलब है कि खपत को हतोत्साहित करने के लिए उन पर भारी कर लगाया जाता है. भारत में सिगरेट पर वर्तमान कर 53 फीसदी है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अनुशंसित 75 फीसदी से कम है. तम्बाकू और तम्बाकू उत्पादों से भारी कर राजस्व प्राप्त होता है. 2022-23 में, उन्होंने सरकारी आय में 72,788 करोड़ रुपये का योगदान दिया.