नई दिल्ली:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एलएचडीसीपी) में सुधार को मंजूरी दे दी. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस ब्रीफिंग में कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी.
उन्होंने कहा, “इस योजना के तीन घटक हैं- राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनएडीसीपी), एलएच एंड डीसी और पशु औषधि. एलएच एंड डीसी के तीन उप-घटक हैं- गंभीर पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (सीएडीसीपी), मौजूदा पशु चिकित्सा अस्पतालों और औषधालयों की स्थापना और सुदृढ़ीकरण – मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई ) और पशु रोगों के नियंत्रण के लिए राज्यों को सहायता (एएससीएडी).
वैष्णव ने कहा कि पशु औषधि को एलएचडीसीपी योजना में नए घटक के रूप में जोड़ा गया है. दो वर्षों- 2024-25 और 2025-26 के लिए योजना का कुल व्यय 3,880 करोड़ रुपये है. जिसमें पशु औषधि घटक के तहत अच्छी गुणवत्ता वाली और सस्ती जेनेरिक पशु चिकित्सा दवा और दवाओं की बिक्री के लिए प्रोत्साहन के लिए 75 करोड़ रुपये की राशि शामिल है.
वैष्णव ने आगे बताया कि खुरपका और मुंहपका रोग (एफएमडी), ब्रुसेलोसिस, पेस्ट डेस पेटिट्स रुमिनेंट्स (पीपीआर), सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (सीएसएफ) और लम्पी स्किन डिजीज जैसी बीमारियों के कारण पशुधन की उत्पादकता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है. एलएचडीसीपी के लागू होने से टीकाकरण जरिये बीमारियों की रोकथाम करके इन नुकसानों को कम करने में मदद मिलेगी.
उन्होंने कहा कि यह योजना मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों (ईएसवीएचडी-एमवीयू) के उप-घटकों के जरिये पशुधन स्वास्थ्य देखभाल की डोर-स्टेप डिलीवरी और पीएम-किसान समृद्धि केंद्र और सहकारी समितियों के नेटवर्क से जेनेरिक पशु चिकित्सा दवा- पशु औषधि की उपलब्धता में सुधार का समर्थन करती है.
उन्होंने कहा कि यह योजना टीकाकरण, निगरानी और स्वास्थ्य सुविधाओं के अपडेशन के जरिये पशुधन रोगों की रोकथाम और नियंत्रण में मदद करेगी. साथ ही, इस योजना से उत्पादकता में सुधार होगा, रोजगार सृजन होगा, ग्रामीण क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और बीमारी के बोझ के कारण किसानों को होने वाले आर्थिक नुकसान को रोका जा सकेगा.
सोनप्रयाग से केदारनाथ तक रोपवे को मंजूरी
इसके अलावा, आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने सोनप्रयाग से केदारनाथ (12.9 किमी) और गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब जी तक 12.4 किमी रोपवे के निर्माण को भी मंजूरी दी.
सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे परियोजना की कुल लागत 4,081.28 करोड़ रुपये और गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब जी के लिए 2,730.13 करोड़ रुपये में रोपवे बनाया जाएगा.
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “रोपवे का निर्माण सार्वजनिक-निजी भागीदारी के जरिये किया जाएगा और यह सबसे उन्नत ट्राई-केबल डिटैचेबल गोंडोला (3S) तकनीक पर आधारित होगा, जिसकी डिजाइन क्षमता 1,800 यात्री प्रति घंटा प्रति दिशा होगी और प्रतिदिन 18,000 लोग यात्रा कर सकेंगे.
उन्होंने कहा, रोपवे परियोजना केदारनाथ आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए वरदान साबित होगी, क्योंकि यह पर्यावरण के अनुकूल, आरामदायक और तेज कनेक्टिविटी प्रदान करेगी और एक तरफ से यात्रा का समय लगभग 8 से 9 घंटे से घटाकर लगभग 36 मिनट कर देगी.”
रोपवे परियोजना, निर्माण और संचालन के दौरान और पूरे साल आतिथ्य, यात्रा, खाद्य और पेय पदार्थ जैसे संबद्ध पर्यटन उद्योगों में पर्याप्त संख्या में रोजगार के अवसर पैदा करेगी. रोपवे परियोजना का विकास संतुलित सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने, पहाड़ी क्षेत्रों में अंतिम मील कनेक्टिविटी को बढ़ाने और तेजी से आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम है.
गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब जी तक 12.4 किलोमीटर रोपवे परियोजना का निर्माण 2,730.13 करोड़ रुपये की कुल पूंजी लागत से डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और हस्तांतरण मोड में किया जाएगा. वर्तमान में हेमकुंड साहिब जी की यात्रा गोविंदघाट से 21 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई है और इसे पैदल या टट्टू या पालकी द्वारा पूरा किया जाता है.
केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा कि प्रस्तावित रोपवे योजना हेमकुंड साहिब जी आने वाले तीर्थयात्रियों और फूलों की घाटी में आने वाले पर्यटकों को सुविधा प्रदान करने के लिए डिजाइन की गई है और यह गोविंदघाट और हेमकुंड साहिब जी के बीच हर मौसम में कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगी.