न्यूयॉर्क:- अमेरिका में अंडों की कीमतें आसमान छू रही हैं. पिछले कुछ हफ्तों में अंडों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है. ट्रंप प्रशासन के आश्वासन के बाद भी कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. सराकरी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में अमेरिका में अंडे की कीमत औसतन 4.95 डॉलर प्रति दर्जन पर पहुंच गईं, जो जनवरी 2023 में निर्धारित पिछले रिकॉर्ड को पार कर गई.
देश के कुछ हिस्सों में अंडे की कीमतों में भारी उछाल आया है. सैन फ्रांसिस्को में एक सुपरमार्केट में इस सप्ताह एक दर्जन अंडे का दाम 10.99 डॉलर था. अमेरिकी कृषि विभाग को उम्मीद है कि इस साल अंडे की कीमतों में 41 प्रतिशत की वृद्धि होगी.
वहीं, कुछ रेस्तरां अंडे ऑर्डर करने पर ग्राहकों से अतिरिक्त अधिभार ) वसूल रहे हैं. प्रसिद्ध अमेरिकी रेस्तरां चेन Denny’s ने कहा कि उसका अधिभार क्षेत्र और यहां तक कि रेस्तरां के अनुसार अलग-अलग है, जबकि वफल हाउस ने अपने सभी रेस्तरां में प्रति अंडे पर 50 सेंट का अधिभार जोड़ा है.
डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता महंगाई और अंडे की कीमतों में उछाल के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. बढ़ी कीमतों को लेकर ट्रंप प्रशासन का विरोध भी शुरू हो गया है. डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थक और कार्यकर्ता ट्रंप को उभरता तानाशाह बता रहे हैं.
दावा किया गया कि ट्रंप के व्यापार युद्ध से फलों और सब्जियों से लेकर सेलफोन, लकड़ी और कारों तक हर चीज की कीमतें और बढ़ सकती हैं. हालांकि, ट्रंप ने कांग्रेस (संसद) में अपने संबोधन में अमेरिका के व्यापारिक साझेदारों पर लगाए जाने वाले टैरिफ का बचाव किया. साथ ही उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन को कीमतों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार बताया.
ट्रंप ने कहा, “जो बाइडेन ने विशेष रूप से अंडों की कीमत को नियंत्रण से बाहर होने दिया – अंडे की कीमतें नियंत्रण से बाहर हो गईं. हम इसे वापस नीचे लाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं.
उद्योग और अधिकांश विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि बर्ड फ्लू के प्रकोप के कारण अंडे की कीमतों में उछाल आया है. अमेरिका अरबपति एलन मस्क ने भी गुरुवार को एक्स पर एक पोस्ट में बाइडेन को कीमतों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार बताया. मस्क ने लिखा, “बाइडेन प्रशासन ने अंडे देने वाली 15 करोड़ मुर्गियों को मारने का आदेश दिया था.
अमेरिका में बर्ड फ्लू के प्रकोप के बाद बड़े पैमाने पर मुर्गियों को मारा गया. संघीय सरकार की नीति के अनुसार, किसानों को वायरस के प्रसार को रोकने में मदद करने के लिए एक मुर्गी के बीमार होने पर पूरे झुंड को मारना पड़ता है. आंकड़ों के अनुसार, 2022 में बर्ड फ्लू का प्रकोप शुरू होने के बाद से कुल 166 मिलियन से अधिक मुर्गियों का मारा गया है, जिनमें से अधिकांश अंडे देने वाली मुर्गियां थीं.