रायपुर- बसंत के मौसम में इन दिनों चारों ओर पलाश के फूलों की रंग बिखरी पड़ी है. होली से पहले खिलने वाले ये फूल आदिवासी अंचलों में कई तरह से इस्तेमाल किए जाते हैं. गांव के लोग इन फूलों को सुखाकर इनसे होली का रंग का तैयार करते हैं. गांव के कुछ लोग इन फूलों को सुखाकर उनसे दवाएं भी बनाते हैं. गांव वालों का कहना है कि पलाश के फूलों के इस्तेमाल से पेट के कीड़े और शरीर का दर्द कम हो जाता है. मनेंद्रगढ़ से लेकर भरतपुर और कोरिया तक में इन फूलों का इस्तेमाल गांव के लोग औषधि के रूप में सालों से करते चले आ रहे हैं.
पलाश के फूलों से होली का गुलाल: गांव वाले कहते हैं कि आज कल जो होली के रंग मिलते हैं वो केमिकल से बने होते हैं. पलाश के फूलों से जो रंग गांव में बनता है वो स्किन के लिए हेल्दी भी है और नुकसान भी नहीं करता. पलाश के फूलों की भरमार होने के चलते इससे रंगों को बनाना आसान होता है और ये महंगा भी नहीं पड़ता. पलाश के फूलों से बने रंगों से होली खेलने पर त्वचा भी सुरक्षित रहती है.
कई तरह की बीमारियों में इसके फूलों का इस्तेमाल किया जाता है. बुखार और लू लगने पर हम इसके रस का इस्तेमाल करते हैं – राजकुमार, ग्रामीण
पलाश की लकड़ी से लाख बनाया जाता है. इसका व्यापारिक कामों में भी इस्तेमाल होता है – जगजीवन, ग्रामीण
फूलों के रस को गर्म कर बच्चों को नहलाया जाता है इससे स्किन रोग और जलन में राहत मिलती है – फूलचंद बैगा, ग्रामीण
पलाश के फूलों का आयुर्वेद में होता है इस्तेमाल: मनेंद्रगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. पूर्णिमा सिंह बताती हैं कि पलाश के फूल, छाल और बीज कई बीमारियों के इलाज में उपयोगी साबित होते हैं. डॉ. पूर्णिमा सिंह कहती हैं कि पलाश के फूलों के चूर्ण को गुड़ के साथ मिलाकर खाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं. पलाश के छाल को उबालकर पीने से पथरी और लिवर संबंधी रोगों में राहत मिलती है. पलाश के फूलों से तैयार किया गया लेप लगाने से स्किन संबंधित रोगों में आराम होता है.
पलाश के बीजों का सेवन करने से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. राजस्थान और गुजरात में विशेष परंपरा के तहत बसंत ऋतु के दौरान पलाश के फूलों से स्नान करने का चलन है, जिससे शरीर में वात, पित्त और कफ का संतुलन बना रहता है – डॉ. पूर्णिमा सिंह, मनेंद्रगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की आयुर्वेद विशेषज्ञ
आय के साधन भी है पलाश का फूल और पत्ता: गांव वाले कहते हैं कि पलाश के फूलों से रंगों का निर्माण होता है. इससे लोगों को अच्छी आय भी हो जाती है. पलाश के पत्तों से दोने और पत्तल भी बनाए जाते हैं जिसका बाजार में बढ़िया डिमांड है. शादी विवाह और पूजा पाठ में इसके पत्ते से बने पत्तल काफी इस्तेमाल किया जाते हैं.
जंगल का सोना: पलाश के पेड़ को गांव के लोग ‘जंगल का सोना’ भी कहते हैं. गांव वालों का कहना है कि यह गरीबों के लिए औषधीय लाभ पहुंचाने वाला पेड़ है. इस पेड़ के पत्ते और फूलों से कई तरह के सामान और रंग भी बनते हैं. आय का एक बड़ा साधन भी पलाश के पेड़ होते हैं.