नई दिल्ली:– जामिया मिल्लिया इस्लामिया के शोधकर्ताओं ने टी सेल को मोडिफाई करने में कामयाबी हासिल कर ली है। इससे न केवल ब्लड कैंसर के मरीजों का इलाज किया जा सकेगा, बल्कि एक सस्ता उपचार विकल्प भी देशवासियों को उपलब्ध कराया जाएगा।
इस शोध को फरवरी 2025 में इंटरनेशनल जर्नल सेल रिपोर्ट मेडिसिन ने स्वीकार भी कर लिया है। इसी के साथ सीएआर टी-सेल थेरेपी के पेटेंट के लिए आवेदन भी किया गया है।
कैंसर कोशिकाओं को टारगेट किया जा सकेगा
जामिया के मल्टी डिस्प्लिनरी सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च एंड स्टडीज (एमसीएआरएस) के निदेशक प्रो. मोहम्मद हुसैन ने बताया कि सीएआर टी-सेल थेरेपी में रोगी की अपनी टी कोशिकाओं को आनुवंशिक रूप से मोडिफाई किया जाता है ताकि कैंसर कोशिकाओं को टारगेट किया जा सके और उन पर हमला कर उन्हें खत्म किया जा सके।
दरअसल, बी-सेल लिम्फोसाइट्स एंटीबॉडी बनाते हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणाली में संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं। असामान्य परिस्थितियों में इनमें बदलाव आ जाता है और यह कैंसर का रूप ले लेती हैं। वहीं टी सेल एक प्रकार की श्वेत रक्त कोशिका होती है।
ये प्रतिरक्षा प्रणाली का हिस्सा होते हैं। किसी भी प्रकार के संक्रमण से लड़ते हैं। प्रो. हुसैन के मुताबिक टी सेल को मोडिफाई करने में कामयाबी मिली है। ब्लड कैंसर से जूझ रहे मरीज के टी सेल को मोडिफाई करने पर वह कैंसर सेल के तेजी के साथ नष्ट कर सकता है।
