नई दिल्ली:– भारतीय मूल की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला की आज 63वीं जयंती है। वे भारत की पहली महिला थी जिन्होंने स्पेस में जाकर इतिहास रच दिया। बचपन से ही आसमान में उड़ने का ख्वाब देखने वाली कल्पना ने अपने सपने को पूरा करने के लिए पूरी जान लगा दी और इतिहास में अपना नाम अमर कर दिया। पंजाब से ताल्लुक रखने वाली भारतीय मूल की अमेरिकी महिला कल्पना चावला को अपने जीवन में दो बार स्पेस में जाने का अवसर मिला। आइए कल्पना चावला की जयंती पर उनके जीवन के कुछ अहम पहलुओं को जान लेते हैं।
कल्पना चावला का जन्म 17 मार्च 1962 में हरियाणा के करनाल में हुआ था। उनकी माता संजयोती चावला थी और पिता बनारसी लाल चावला थे। बचपन से ही पढ़ने में रुचि रखने वाली कल्पना हमेशा टॉप छात्रों की लिस्ट में रहती थी। उनके माता-पिता चाहते हैं थे कि वे टीचर बने। लेकिन उन्होंने अंतरिक्ष यात्री बनने का ख्वाब देख लिया था।
अमेरिका से पूरी की मास्टर की पढ़ाई
बैचलर डिग्री प्राप्त करने के बाद कल्पना चावला अपनी मास्टर की पढ़ाई करने के लिए अमेरिका चली गईं। रिपोर्ट्स के अनुसार 1984 में उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर की डिग्री हासिल की। केवल इतना ही नहीं 1988 में पीएचडी की डिग्री भी प्राप्त की। वह 1988 का ही समय था जब चावला ने नासा के लिए कार्य करना शुरू कर दिया। कार्य करने के दौरान ही 1994 में उन्हें स्पेस मिशन के लिए चयनित कर लिया गया। उनका चयन अंतरिक्ष यात्री के रूप में किया गया।
अंतरिक्ष की सैर करने वाली पहली भारतीय महिला
सबसे खास बात यह है कि अंतरिक्ष की सैर करने वाली पहली भारतीय महिला कल्पना चावला ने एक नहीं बल्कि दो बार स्पेस की सैर की। 1997 में उन्हें पहली बार अंतरिक्ष उड़ान के लिए चुना गया था। उनकी पहली उड़ान 19 नवंबर से 5 दिसंबर तक चली। इसके बाद 2003 में उन्होंने कोलंबिया शटल से स्पेस के लिए अपनी दूसरी उड़ान भरी। 16 दिनों तक चलने वाला यह अभियान 1 फरवरी को संपन्न होना था लेकिन यान के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण वे वापस नहीं आ पाई और कल्पना समेत अन्य 6 यात्रियों की भी मौत हो गई। पूरा विश्व आज भी कल्पना को उनके योगदान के लिए याद करता है। उनके योगदान के लिए उन्हें कई अवॉर्ड और सम्मान दिए गए।
