रायपुर :- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर कभी तालाबों के शहर के नाम से विख्यात थी.लेकिन मौजूदा समय में अब गिनती के तालाब रह गए हैं.विकास के नाम पर तालाबों को पाट दिया गया है.कहीं ऊंची इमारतें बना दी गई हैं.तो कहीं शॉपिंग मॉल बनाकर शहर को विकास का चोला ओढ़ा दिया गया है.शहर में जहां कहीं भी तालाब थे उन इलाकों में कई लोगों ने अतिक्रमण करके मकान और दुकान बना लिया है.ऐसे में कई तालाब अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं.
300 तालाब अब रह गए आधे से कम : इतिहासकारों और जानकारों का कहना है कि 15वीं शताब्दी से लेकर 18वीं शताब्दी के मध्य तक रायपुर में लगभग 300 तालाब हुआ करते थे. लेकिन वर्तमान समय में इसकी संख्या लगभग 126 पर सिमट गई है. तालाबों की संख्या कम होने के कारण राजधानी का भूजल स्तर भी गिरता जा रहा है. पुराने समय में लोग इन्हीं तालाबों के पानी से खाना बनाने के साथ ही अपने निस्तारी का काम पूरा किया करते थे
1402 के शिलालेख में बूढ़ा तालाब का जिक्र : इतिहासकार डॉक्टर रमेंद्रनाथ मिश्र का कहना है कि रायपुर को जब कल्चुरी राजाओं की राजधानी के रूप में विकसित किया गया, उस जमाने में लगभग 300 तालाब हुआ करते थे. 18वीं शताब्दी के मध्य तक तालाबों की संख्या घटकर लगभग 126 हो गई है. बूढ़ा तालाब में 1402 का शिलालेख मिलता है. राजा और शहर के बारे में इस शिलालेख में वर्णन मिलता है. पुराने समय के पांडुलिपि के आधार पर रायपुर को तालाबों का शहर कहा जा सकता है.”
तालाबों से घिरा हुआ था शहर : इतिहासकार के मुताबिक बूढ़ा तालाब, महाराज बंद तालाब, मलसाय तालाब, भैया तालाब, खोखो तालाब, बंधवा तालाब, आमा तालाब हांडी तालाब, कंकाली तालाब, राम सागर तालाब, राजा तालाब मोती बाग में बैद्यनाथ तालाब हुआ तो करता था जो आज मोतीबाग के नाम से जाना जाता है. रायपुर शहर चारों तरफ से तालाबों से घिरा हुआ शहर है.
शहर के मध्य में दो महत्वपूर्ण तालाब हैं, जिसमें पहले कंकाली तालाब और दूसरा बुढ़ापारा स्थित बूढ़ा तालाब. कंकाली तालाब को कृपाल गिरी गोस्वामी ने बनवाया था. दूसरा तालाब राम सागर तालाब था, जिसे आज लोग रामसागर पारा के नाम से जानते हैं. रायपुर का खोखो तालाब और रामसागर तालाब महत्वपूर्ण तालाब माने गए हैं. रामसागर तालाब के बारे में कहा जाता है कि देश के पहले लेखक बस्तर भूषण केदारनाथ ठाकुर के द्वारा बनवाया गया था. माता और पिता की मृत्यु कार्तिक पूर्णिमा के दिन हुई थी और उन्हीं की स्मृति में रामसागर तालाब का निर्माण कराया गया था, लेकिन वह भी आज अपना अस्तित्व खो चुका है- डॉ रमेंद्रनाथ मिश्र इतिहासकार
भूजल वैज्ञानिक विपिन दुबे के मुताबिक तालाब रायपुर शहर का हृदय है. तालाब की वजह से बारिश और दूसरे सोर्स का पानी रहता है. जिसकी वजह से लोगों को पानी मिल पाता है. तालाब के माध्यम से ही हजारों लोगों के निस्तार का काम भी होता है. यह स्थिति केवल रायपुर शहर की नहीं है बल्कि पूरे प्रदेश में तालाबों की संख्या पहले की तुलना में काफी घट गई है.
तालाबों की घटती संख्या की वजह से भूजल का स्तर भी घटता जा रहा है. शहर में विकास होने की वजह से तालाबों की संख्या वर्तमान में घटते जा रही है. ऐसे में सरकार को चाहिए कि तालाबों का संरक्षण और संवर्धन करें जिससे भूजल का स्तर बराबर बना रहे- विपिन दुबे, भूजल वैज्ञानिक
पुरानी बस्ती के स्थानीय निवासी विजय कुमार झा के मुताबिक वो पिछले 64 साल से रायपुर में रह रहे हैं.उनका जन्म भी रायपुर में ही हुआ है. रायपुर में कलचुरी काल के समय लगभग 300 तालाब थे. जो आज आधे से भी कम हो गए हैं. तालाबों की घटती संख्या के बारे में उन्होंने कहा कि इसका मुख्य कारण यह है कि धीरे-धीरे शहर की आबादी बढ़ रही है.शहर में प्लाट कटिंग हो रहे हैं. सौंदर्यीकरण का काम हो रहा है. इन्हीं सब कारणों से तालाबों की संख्या घट गई
अवैध कब्जा भी बड़ा कारण : विजय कुमार झा के मुताबिक तालाबों में अवैध कब्जा कर शॉपिंग मॉल भी बनाए जा रहे हैं. पुराने समय में हैंडपंप और नल नहीं हुआ करते थे उस समय लोग तालाब और कुआं के भरोसे अपना काम चलाया करते थे. पुरानी बस्ती वह एरिया है जिसे लोग तालाब और मंदिर के नाम से जानते हैं.
800 साल पहले शुरु हुआ विकास : आपको बता दें कि ऐतिहासिक और पुरातत्व दृष्टि से रायपुर का इतिहास हजारों साल पुराना है. कलचुरी वंश में जब विभाजन हुआ, तब 14 वीं शताब्दी के अंत में रायपुर की स्थापना हुई. शुरूआत में रायपुर की राजधानी खल्लारी थी.इतिहास के मुताबिक राजा हाजीराज ने दक्षिणी भाग में हाटकेश्वर मंदिर और किला बनाया. खारुन नदी जिसे पहले राठिका नदी के नाम से जाना जाता था.उनके बेटे ने शहर के विकास के लिए बूढ़ातालाब , महामाया मंदिर और महाराज बंध के मध्य किला बनवाया। इसका प्रमाण 1402 के शिलालेख से हुआ है. इसके आधार पर यह कह सकते हैं कि रायपुर का विकास 800 साल पहले शुरू हो गया था.उस समय बस्ती का नाम ब्रह्मपुरी रखा गया.इस दौरान करीब 300 से ज्यादा तालाब इस भाग में थे.