बस्तर :- छत्तीसगढ़ के बस्तर में हरा सोना यानी तेंदूपत्ता जंगलों में रहने वाले आदिवासियों की आय का बड़ा स्त्रोत है. विष्णुदेव साय सरकार ने पिछले साल तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए प्रति बोरा मानक दर 4 हजार रुपए से बढ़ाकर 5500 रुपए तय किया था. साथ ही साथ तेंदूपत्ता को समितियों के माध्यम से खरीदा था.लेकिन इस बार एक कदम आगे बढ़ते हुए शासन ने संग्राहकों से सीधा तेंदूपत्ता खरीदने का प्लान तैयार किया है. जिससे शासन और संग्राहकों के बीच बिचौलियों खत्म हो जाएंगे. जिसका सीधा लाभ तेंदूपत्ता संग्राहकों को होगा.
बिचौलिये और ठेकेदार खत्म होने से जहां एक ओर संग्राहकों को सीधी राशि बैंक अकाउंट में मिलेगी,वहीं दूसरी ओर नक्सलियों की फंडिंग भी रुकेगी.क्योंकि कई मौकों पर देखा गया है कि ठेकेदार प्रभुत्व कायम करने के लिए नक्सलियों का समर्थन लेते थे.इसके एवज में उन्हें फंड मुहैया करवाया जाता था.लेकिन तेंदूपत्ता की सीधी खरीदी होने से संग्राहक ही लाभ में रहेंगे.
सीधा शासन खरीदेगी तेंदूपत्ता : हरा सोना कहलाने वाला तेंदूपत्ता बस्तर का महत्वपूर्ण वन उत्पाद है. जो बस्तर क्षेत्र के आदिवासियों के लिए रोजगार भी मुहैया करवाता है. हर साल तेंदूपत्ता खरीदी की प्रक्रिया में टेंडर जारी होते थे. जिसके बाद ठेकेदार इन पत्तों की खरीदारी करते थे. लेकिन इस साल से वनविभाग तेंदूपत्ता संग्राहकों से सीधी खरीदी करेगा. बस्तर रेंज सीसीएफ आरसी. दुग्गा ने बताया कि 2025 के नए नियमों के तहत सरकार ने तेंदूपत्ता खरीदी की पूरी जिम्मेदारी अपने हाथों में ले ली है.
वन विभाग ने इस प्रक्रिया के लिए पूरी तैयारी कर ली है. पहले भी जहां ठेकेदार खरीदी नहीं करते थे. वहां वन विभाग ही खरीदी करता था. कई बार खरीदी में शिकायत, राशि वितरण में शिकायत भी प्राप्त होती थी. नगद भुगतान में दिक्कतों की शिकायत मिलती थी. इस साल इस खरीदी कार्य में पारदर्शिता के लिए सभी हितग्राहियों का बैंक अकाउंट खोला जा रहा है. जहां भी इसकी कमी है. उसे पूर्ण करके सीधे हितग्राहियों के खाते में पैसे डाले जाएंगे. इससे बीच का काम बंद हो जायेगा – आरसी दुग्गा,सीसीएफ
वहीं इस मामले में बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि बस्तर में लंबे समय से काबिज नक्सलियों को खात्मा किया जा रहा है. नक्सलियों के सप्लाई नेटवर्क को ध्वस्त किया जा रहा है. साथ ही नक्सलियों की फंडिंग को भी रोका जा रहा है. वन संपदा से भरपूर बस्तर में रहने वाले आदिवासी ग्रामीणों और ठेकेदारों से नक्सली लेवी वसूलते आ रहे हैं.
बस्तर में तेंदूपत्ता का बड़ा हिस्सा नक्सलियों की आय स्रोत में शामिल था. नक्सली ठेकेदारों से राशि वसूलते थे. जिससे वे अपनी गतिविधियों को फंडिंग करते थे. इसके अलावा एंटी नक्सल ऑपरेशंस और आत्मसमर्पण नीति के तहत अभियान चलाया जा रहा है. अंदरूनी इलाकों में सुरक्षाकैम्प स्थापित किया जा रहा है. ताकि पुलिस से मिलकर भयमुक्त होकर बस्तर के वनोपज को ग्रामीण और सरकार इस्तेमाल और खरीदी बिक्री कर सकें. यह कदम आदिवासी समुदाय के लिए भी फायदेमंद होगा. क्योंकि अब तेंदूपत्ता का व्यापार पूरी तरह से सरकार के नियंत्रण में होगा और आदिवासियों को अपनी मेहनत का सही मूल्य मिलेगा -सुंदरराज पी , आईजी
आदिवासियों की हितों की होगी रक्षा : बस्तर आईजी पी सुंदरराज के मुताबिक बिना किसी बिचौलिये के हस्तक्षेप से उपज बेचने का मौका मिलेगा और उनके आर्थिक स्तर में सुधार हो सकता है. आदिवासी समुदाय के हितों की रक्षा करने और वन संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा देने में मदद होगा.
आपको बता दें कि बस्तर के किसान खेती-किसानी के साथ-साथ तेंदूपत्ता संग्रहण का काम कई वर्षों से कर रहे हैं. गांव में तेंदूपत्ता संग्रहण से गर्मी के दिनों में कुछ कमाई हो जाती है. एक-एक पत्तों को तोड़कर बण्डल बनाने में काफी मेहनत लगती है. शासन ने संग्राहकों के परिश्रम का महत्व को समझते हुए राशि बढ़ाई है जो सराहनीय है. साथ ही साथ बस्तर के जिन इलाकों से नक्सल समस्या का अंत हुआ है. उन इलाकों के आदिवासी अब सीधे बिना किसी डर के वनविभाग को अपना तेंदूपत्ता बेचेंगे.