बिलासपुर:- सेंदरी मेंटल हॉस्पिटल में स्टाफ की कमी पर जनहित याचिका पर गुरुवार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि पूर्व में लगातार समय लेने के बाद भी राज्य शासन की ओर से जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया. कोर्ट ने मुख्य सचिव को शपथपत्र पर जवाब देने को कहा है.
राज्य में मानसिक रोगियों के इलाज के लिए सेंदरी में एकमात्र मानसिक अस्पताल है. यहां अधिनियम के अनुसार प्रावधान और सुविधा नहीं होने पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है. मामले में हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान भी लिया है. दोनों मामलों की एक साथ सुनवाई चल रही है. याचिका में बताया गया कि, डब्ल्यूएचओ के नियम अनुसार 10 हजार लोगों पर 1 मनोचिकित्सक होना चाहिए, जबकि राज्य में 8 लाख लोगों पर एक है. प्रावधान के अनुसार हर जिले में एक मानसिक स्वास्थ्य केंद्र और मनोचिकित्सक होने चाहिए.
याचिका में यह भी बताया कि प्रदेश के एकमात्र राज्य मानसिक चिकित्सालय सेंदरी के लिए 11 चिकित्सकों के पद स्वीकृत है, लेकिन उनमें से मात्र 3 पद पर ही सायकेट्रिस्ट नियुक्त हैं. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात को गंभीरता से लिया कि, मनोचिकित्सक के पद ही नहीं भरे गए.
कोर्ट ने कहा कि प्रावधान अनुसार इलाज के लिए प्रदेश में की जा रही व्यवस्था और मानसिक चिकित्सालय में रिक्त पद भरने के लिए क्या किया जा रहा, राज्य शासन को यह बताने के निर्देश दिए थे. लेकिन समय लेने के बाद भी कोई जवाब पेश नहीं किया गया.
नवम्बर 2024 में हुई सुनवाई में राज्य शासन ने कोर्ट को बताया था कि मेंटल हास्पिटल में रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, पर इसमें समय लगेगा इसके बाद शासन की तरफ से दो बार समय लेने के बाद भी जवाब नहीं दिया गया. इसे कोर्ट ने गंभीरता से लिया है.