नई दिल्ली:– ऑफिस में काम करते हुए हम इतने बिजी शेड्यूल में होते है कि, बाहर जाकर कॉफी या चाय लेना नहीं हो पाता। इसकी वजह से ऑफिस की मशीन वाली कॉफी या चाय पी लेते है। भलें ही कुछ समय के लिए राहत देती है लेकिन आपके सेहत पर किस तरह से नुकसान पहुंचाती है आप शायद नहीं जानते। हाल ही में रिसर्च के दौरान एक चौंका देने वाला खुलासा हुआ है जिसके अनुसार, मशीन वाली कॉफी के बार-बार सेवन से आपका कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ जाता है। कई मामलों में आपके दिल को भी नुकसान पहुंचता है।
किस वजह से है नुकसानदायक
आपको बताते चलें कि, मशीन वाली कॉफी सेहत के लिए नुकसान पहुंचाने वाली होती है। यहां पर समझें तो, एक रिसर्च में पाया गया है कि ऑफिस की मशीनों में बनाई गई कॉफी में पेपर से फिल्टर की गई कॉफी की तुलना में कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने वाले कंपाउंड्स काफी ज्यादा होते हैं। इस स्टडी को दरअसल रिसर्च में 14 अलग-अलग ऑफिस की मशीनों के साथ जांच की गई। यहां पर जांच के दौरान पता चला कि, इन कॉफी में दो नेचुरल डायटरपीन कैफेस्टोल और कहवेओल की मात्रा होती है। जो कंपाउंड्स कॉफी के ऑयल में पाए जाते है। इस वजह से आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ जाता है।
इन कॉफी में बढ़ने लगता है कंसंट्रेशन का स्तर
आपको बताते चलें कि, रिसर्चरों ने पता लगाया है कि, आपके ऑफिस में मशीन वाली कॉफी में 176 मिलीग्राम प्रति लीटर कैफेस्टोल कंसंट्रेशन मिला है, जो पेपर-फिल्टर्ड कॉफी में मौजूद 12 मिलीग्राम प्रति लीटर से करीब 15 गुना ज्यादा है. इस स्टडी में बताया गया है कि जो एम्प्लॉइज दिन में 3 या ज्यादा कप कॉफी पीते हैं, वो अनजाने में अपने बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ा रहे होते हैं। पेपर फिल्टर इन खराब तत्वों का बचाव होता है तो वहीं पर मेटल फिल्टर जो वर्कप्लेस के ब्रूअर्स में उपयोग होते हैं, उन्हें जाने देते हैं, जिससे वे आपके कप में आ जाते हैं और उनका कंसंट्रेशन बढ़ जाता है। शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल का इजाफा होता है।
जानिए क्या होता है सेहत के लिए सही
यहां पर रिसर्चर इस खतरे से बचने के लिए जरूरी देखभाल की बात करते है। अगर आप मेटल-फिल्टर्ड कॉफी की बजाय पेपर-फिल्टर्ड कॉफी पीते हैं तो बैड कोलेस्ट्रॉल 0.58 mmol/L तक घट सकता है. अगर इसे डेली इनकेट से 2 औंस हेवी क्रीम के बराबर हटा दें तो 5 साल में हार्ट डिजीज का खतरा 13% तक कम हो सकता है। वहीं पर मशीन वाली कॉफी की बजाय आप घर की कॉफी पीते है तो, 30 प्रतिशत से ज्यादा दिल की बीमारियों का खतरा टल जाता है।
