नई दिल्ली:– किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने को लेकर अब स्कूलों की मनमानी नहीं चलेगी। दिल्ली सरकार आदेश जारी करने जा रही है, जिससे स्कूल या किसी विशेष विक्रेता से यूनिफॉर्म और किताबें खरीदने की अनिवार्यता नहीं थोपी जा सकेगी। सूत्रों की मानें तो स्कूल फिर भी ऐसा करते हैं तो वह दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आएगा। 1 अप्रैल से स्कूलों में शुरू होने वाले नए शिक्षण सत्र से पहले ही यह आदेश जारी कर दिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने ऐसी शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए यह आदेश जारी करने को कहा है। सरकार यह भी सुनिश्चित करेगी है कि स्कूल तीन साल तक यूनिफॉर्म में बदलाव नहीं कर पाएंगे।
हेल्पलाइन नंबर-ईमेल आईडी जारी किए जाएंगे
विभाग से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि अभिभावकों को अपनी शिकायतें दर्ज कराने के लिए सरकार एक ई-मेल आईडी और हेल्पलाइन नंबर भी जारी करेगी। सरकार का कहना है कि यह कदम अभिभावकों पर वित्तीय दबाव को कम करने के लिए उठाया जा रहा है। आदेश में यह भी उल्लेख होगा कि स्कूलों को कम से कम पांच दुकानों के पते और संपर्क विवरण प्रदर्शित करने होंगे, जिससे अभिभावकों के पास विकल्प हों।
स्कूलों की स्थिति पर ऐक्शन रिपोर्ट तैयार करेगी दिल्ली सरकार : शिक्षा मंत्री
पीटीआई के अनुसार, वहीं दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने सोमवार को विधानसभा को सूचित किया कि राजधानी में स्कूलों की खराब स्थिति पर एक ऐक्शन रिपोर्ट तैयार की जाएगी। दिल्ली विधानसभा के बजट सत्र में बोलते हुए मंत्री ने स्कूल के बुनियादी ढांचे के बारे में विभिन्न विधायकों द्वारा उठाई गई चिंताओं को संबोधित किया।
गांधी नगर से पांच बार के भाजपा विधायक अरविंदर सिंह लवली ने ब्रह्मपुरी मेन रोड पर एक स्कूल की खराब स्थिति को उजागर किया और कहा कि यमुनापार क्षेत्र के कई स्कूल इसी तरह की स्थिति में हैं। उन्होंने मंत्री से ऐसे स्कूलों का डिटेल प्रदान करने का आग्रह किया, जिस पर सूद ने आश्वासन दिया कि आवश्यक जानकारी एकत्र की जाएगी और सदन में प्रस्तुत की जाएगी।
इसी तरह, भाजपा विधायक कुलवंत राणा ने साहेब हदरी में एक स्कूल की जीर्ण-शीर्ण स्थिति की ओर इशारा किया। उन्होंने पूछा, “पिछली सरकार ने स्कूल का निर्माण किया था, लेकिन दो साल के भीतर इसकी छत गिर गई। इसके पीछे क्या कारण था और क्या इमारत का पुनर्निर्माण किया जाएगा?”
प्रतिभा स्कूलों के बारे में चिंता जताते हुए विश्वास नगर से भाजपा विधायक ओपी शर्मा ने दावा किया कि 1993 से 1998 के बीच बने कई स्कूलों को पिछली सरकार ने बंद कर दिया था। उन्होंने सरकार से प्रतिभाशाली छात्रों की मदद के लिए इन स्कूलों को फिर से खोलने का आग्रह किया।
इन चिंताओं के जवाब में सूद ने कहा, “स्कूलों की स्थिति पर एक ऐक्शन रिपोर्ट तैयार की जाएगी और सदन में पेश की जाएगी।”
