रायपुर :- रायपुर नगर निगम का बजट शुक्रवार को पेश हो गया. पिछले साल के मुकाबले इस साल का बजट 4 सौ करोड़ रुपए कम है. जिसे लेकर मेयर मीनल चौबे ने शहर को संवारने का संकल्प लिया है. इस साल रायपुर नगर निगम का 1529 करोड़ 53 लाख 28 हजार रुपए का बजट पेश किया गया.वहीं बजट पेश करने के दौरान महापौर मीनल चौबे का अलग अंदाज देखने को मिला. मीनल चौबे ने अपने बजट भाषण में एक के बाद एक धमाकेदार शायरियां पढ़कर सभापति और पार्षदों का ध्यान अपनी ओर खींचा.
” बेटी अब बेबस नहीं, कहानी नई लिख रही है,
हाथों में कलम लिए, शहर की तकदीर गढ़ रही है
रायपुर की गलियों से चलकर, जो धीरे-धीरे आगे बढ़ी,
वही बेटी, अब शहर की एक नई पहचान लिख रही है “
” रख हौसला वह मंजर भी आएगा, प्यासे के पास चलकर समंदर भी आएगा,
थक कर ना बैठ ऐ मंजिल के मुसाफिर, मंजिल भी मिलेगी,मिलने का मजा भी आएगा “
” शहर की रौशनी में कई बार जो बड़े नज़र आते हैं,
असल में ये वही चेहरे है, जो अंधेरे फैलाते हैं “
” मेरे शहर में मैंने एक अल्प विराम देखा है,
पूर्ण का आधा, पर एक सम्पूर्ण विराम देखा है”
” पसीने की स्याही से, जो लिखते हैं इरादे,
उसके मुकद्दर के सफेद पन्ने, कभी कोरे नहीं होते”
” कश्ती चलाने वाले ने जब हार कर दी पतवार हमें,
लहर-लहर तूफान मिले और मौज-मौज मझधार हमें,
फिर भी दिखाया है हमने और फिर ये दिखा देंगे सबको,
इन हालातों में आता है दरिया करना पार हमें “
पिछला कार्यकाल सपनों के नाम रहा, सपनों के दाम रहा,
सपनों के घोड़ों पर बैठे शहंशाह पर, किसी का लगाम न रहा
” हमने बनाया है, हम ही सवांरेंगे, रायपुर को स्वर्ग सा निखारेंगे
हर गली हर मोड़ चमकायेंगे नव निर्माण की लौ जलायेंगे
बजट हमारा विकास की पहचान, नये सपनों को देंगे सम्मान “
” वो झूठ बोल रहा था बड़े सलीके से,
मैं ऐतबार नहीं करती, तो और क्या करती”
” लोग कहते हैं बदलता है जमाना अक्सर,
हम वो हैं जो जमाने को बदल देते हैं “
” कोई न हो उदास तो समझो बसंत है, हर घर में हो उल्लास तो समझो बसंत है,
जो कंठ तरसते रहे पानी को हमेशा, बुझ जाए उनकी प्यास तो समझो बसंत है”
मुझसे ना पूछना कि मेरी मंजिल कहां है, अभी तो मैंने बस इरादा किया है,
इतना यकीन है कि हारूंगी नहीं, क्योंकि मैंने किसी और से नहीं,
बल्कि खुद से ये वादा किया है