कोडरमा: – चाराडीह पंचायत स्थित गाजेडीह आंगनबाड़ी केंद्र की हालत बदतर है. यहां सेविका और सहायिका महज औपचारिकता पूरी करने आंगनबाड़ी केंद्र आती हैं. आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों की संख्या भी पूरी नहीं है. आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों की संख्या रजिस्टर में 20 से 25 हैं लेकिन आंगनबाड़ी केंद्र में महज 3 से 4 बच्चे ही आते हैं.
आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के पढ़ने की भी मुकम्मल व्यवस्था नहीं है. तस्वीरों में देखा जा सकता हैं कि आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को पढ़ाने के लिए जो पोस्टर लगे हैं लेकिन वो भी फटे हुए. खेल-खेल में बच्चों को पढ़ाने के लिए कलेंडर या कार्ड बोर्ड होता हैं वो भी उखड़ा पड़ा है. इसके साथ ही बच्चों को खेलने के लिए कोई भी खिलौना आंगनबाड़ी केंद्र में नहीं है.
आंगनबाड़ी केंद्र में नहीं मिलता बच्चों को पोषाहार
बच्चों के अभिभावकों ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका और सहायिका यहां मनमौजी और महज खानापूर्ति के लिए आती हैं. जबकि बच्चों को घर से लाने की जिम्मेदारी उसकी है, जिसे वो पूरा नहीं करती हैं. आपको बता दें कि गाजेडीह आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को पोषाहार मिलना चाहिए वो भी बच्चों को नहीं मिलता हैं.
बच्चों की अटेंडेंस में फर्जीवाड़ा
गाजेडीह आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका अनिता देवी से जब बच्चों का अटेंडेंस रजिस्टर मांगा तो वो अटेंडेंस रजिस्टर दिखाने में आनाकानी करने लगी. आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ने वाले बच्चों ने पोषाहार मिलने से संबंधित कोई जवाब नहीं दिया. आंगनबाड़ी केंद्र में पोषाहार भी कही नजर नहीं आया. बच्चों की अभिभावकों की माने तो केंद्र की सेविका और सहायिका रजिस्टर में फर्जी बच्चों का अटेंडेंस बनाती हैं और बच्चों के पोषाहार को गटक जाती हैं.
जिम्मेदारियों से भागती नजर आई सेविका
आंगनबाड़ी केंद्र में पहुंचने वाले कुछ ही बच्चों को पोषाहार मुश्किल से मिल पाता है. इधर आंगनबाड़ी केंद्र के सहायिका प्रीति कुमारी को यह भी पता नहीं है कि बच्चों को किस दिन कौन सा पोषाहार दिया जाता है. आंगनबाड़ी देखकर यह कहा जा सकता हैं कि आंगनबाड़ी केंद्र महज खानापूर्ति के लिए संचालित हो रहा है. यहां की सेविका और सहायिका अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल हैं. गौरतलब है कि नैनिहालो को प्रारंभिक शिक्षा देने की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी केंद्रों की होती हैं और सरकार भी इसी उद्देश्य से आंगनबाड़ी केंद्रों को संचालित करती हैं. ऐसे में अगर आंगनबाड़ी केंद्रों की यह स्थिति रहेगी तो नैनिहालों का भविष्य कैसे बनेगा.