कोरबा:- विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा के ग्राम पंचायत अडसरा के आश्रित ग्राम केदाई पड़ो मोहल्ला में जलजनित बैक्टीरिया कवक संक्रमण के दुष्प्रभाव से चर्मरोग की भयावहता से बेकाबू हो चुके हालात जिसकी मूल वजह विजय वेस्ट कोयला खदान से अपशिष्ट जहरीले निष्कासित प्रदूषित पानी की वजह पूरे गांव में स्किन इंफेक्शन का भयानक प्रकोप फैल गया और घाव के आगोश में गांव एवं यहां आसपास रहने वाले पिछड़े संरक्षित अल्पशिक्षित भोले-भाले पंडों परिवार इस आपदा के शिकार हो गए,लेकिन सूचना मिलते ही स्वास्थ्य अमला हरकत में आया मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के निर्देशन एवं पद्माकर सिंदे डीपीएम के मार्गदर्शन में टीम गठित कर मॉनिटरिंग करते हुए जन जागरूकता कैंपों के माध्यम त्वरित उपचार करने अथक प्रयास किए जा रहे हैं । जिसका सार्थक परिणाम आना भी शुरू हो गया।

बच्चे हुए इस संक्रमण का शिकार।
पी आर भारद्वाज अनुविभागीय दंडाधिकारी (राजस्व )अनुभाग पोड़ी उपरोड़ा प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कर त्वरित सहायता का आश्वासन देते हुए प्रबंधक कोल माइंस विजय बेष्ट को मौके पर ही टैंकर से गांव में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने पीएचई विभाग को पानीकी जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने एवं गांव में पेयजल जल कनेक्शन पाइप तुरंत बिछाने एवं पर्यावरण प्रदूषण विभाग को जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने निर्देशित किया।

संक्रमित से प्रभावित बच्चों की स्थितियां।
बच्चों के हाथों पर संक्रमण के घाव, बुखार से कराहते मासूमों गांव के बच्चों की दयनीय हालातों तेज़ बुखार, हाथों की सूजन और सिकुड़ते अंगों की तकलीफ से जूझते ये मासूम साहसिक परीक्षा देने को मजबूर हैं। खुजली, फोड़े-फुंसी और मवाद भरे घाव इनको दर्द की असहनीय वेदना से दिन रात जीना मुश्किल कर रखा हैं। यह केवल एक स्वास्थ्य आपदा नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की लापरवाही निरंकुशतावाद का खुला उदाहरण है।

बड़े-बुजुर्गों का जीवन खतरे में
बड़े लोगों को पूरे शरीर में असहनीय खुजली, फोड़े-फुंसी और त्वचा रोग हो गए हैं। यह संक्रमण तेजगति से गांव में फैल रहा है,पीड़ितों के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग की टीम यहां नहीं पहुंची होती तो भयावहता कॉफी बढ़ जाती।
गांव में न स्कूल, न आंगनबाड़ी – आखिर क्यों उपेक्षित हैं ये लोग ?
गांव में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। शिक्षा न स्कूल, न आंगनबाड़ी और न ही स्वच्छ जल की व्यवस्था। क्षेत्र के निवासियों को उपेक्षित जीवन निर्वाह कर संवेदनहीन पराकाष्ठा का सामना करना पड़ता है !

संक्रमण का तेजगति से फैलाव।
खदान जीने का हक भी छीन लिया
कोयला खदानों से फसलें बर्बाद हो रही है,यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह गांव किसी भी दिन पूरी तरह जमींदोज हो सकता है सामाजिक संगठन जागे, लेकिन सरकार नहीं।
एकता परिषद संगठन और सर्व आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ के पदाधिकारी गांव पहुंचे। उन्होंने देखा कि कैसे लोग तड़प-तड़प बड़े, बच्चों की चीखें प्रशासन के कानों तक पहुंचनी चाहिए।
गांव में तबाही का मंजर साफ है। लोग मरने की कगार पर हैं, लेकिन सवाल यह मानवता के खिलाफ एक और बड़ा अपराध साबित होगा अब देखना यह है कैसे इन भोले भाले मासूमों तक सुविधाएं पहुंचते हुए संरक्षित रखने कार्य किया जाएगा और यह पलायन को मजबूर ना हो।

