कोलकाता:- पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज राज्य भर में हजारों शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मियों के बीच पनप रहे गुस्से को कम करने की कोशिश की. ये सभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बेरोजगार हो गए हैं. सीएम ममता ने कहा कि उनकी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि सभी योग्य उम्मीदवार अपनी नौकरी बरकरार रखें और उनकी सर्विस में कोई रुकावट न आए.
मुख्यमंत्री ने कहा, “जब तक मैं जिंदा हूं, मैं किसी को भी योग्य शख्स से नौकरी नहीं छीनने दूंगी. यह मेरी चुनौती है. राज्य की शिक्षा प्रणाली को डिसेबल करने की साजिश है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश में स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया गया है कि कौन योग्य है और कौन नहीं. हम इस आदेश को स्वीकार नहीं कर सकते.”
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, “हम सुप्रीम कोर्ट से उनके आदेश और उन्होंने किस तरह योग्य और अयोग्य को अलग किया, इस बारे में विस्तृत स्पष्टीकरण मांगेंगे. फिर भी अगर चीजें दूसरी तरफ जाती हैं, तो राज्य सरकार के पास यह सुनिश्चित करने की योजना होगी कि कोई सेवा बाधित न हो.” ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नेताजी इंडोर स्टेडियम में वंचित शिक्षक संघ की बुलाई गई बैठक को संबोधित कर रही थीं.
कोर्ट ने चयन प्रक्रिया को दूषित बताया
बता दें कि तीन अप्रैल को भारत के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की अध्यक्षता वाली पीठ ने पश्चिम बंगाल के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के 25,752 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति को अमान्य करार देते हुए पूरी चयन प्रक्रिया को दूषित और दागी बताया था. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के पिछले आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती के लिए 2016 स्कूल सेवा आयोग पैनल को अमान्य करार दिया गया था.
‘हम आदेश में संशोधन की मांग करेंगे
ममता ने कहा, हमें कोर्ट से स्पष्टीकरण की आवश्यकता है, क्योंकि सरकार के पास योग्य और अयोग्य के बीच अंतर करने का कोई मौका नहीं है, जबकि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बंधे हुए हैं, हम यह सुनिश्चित करने के लिए एक्टिव कदम उठा रहे हैं कि स्थिति को अत्यंत सावधानी से संभाला जाए. हम आदेश में संशोधन और अन्य राहत की मांग करेंगे.
उन्होंने संकेत दिया कि राज्य सरकार तीन अप्रैल के आदेश की समीक्षा याचिका के साथ सु्प्रीम कोर्ट का रुख करेगी. उन्होंने कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, प्रशांत भूषण, राकेश द्विवेदी, कल्याण बनर्जी और अन्य सहित कई शीर्ष वकीलों के नाम भी सूचीबद्ध किए, जिन्हें उनकी सरकार इस समीक्षा याचिका का मुकाबला करने के लिए नियुक्त करेगी.
विपक्ष पर निशाना साधा
ममता ने मंच का इस्तेमाल करते हुए विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, कुछ लोग पूरी शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त करने के लिए गंदा खेल खेल रहे हैं. मुझे इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था और मुझे इस मामले में घसीटा जा रहा है और कहा जा रहा है कि मैं कुछ लोगों को बचाने की कोशिश कर रही हूं. अगर कोई मुझे नौकरी गंवाने वालों के साथ खड़े होने के लिए फंसाने की कोशिश करेगा तो मैं जेल जाने को तैयार हूं.
मध्य प्रदेश में व्यापम मामले का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “मध्य प्रदेश में व्यापम मामले के प्रकाश में आने के बाद 89 लोगों की मौत हो गई, कितने लोगों को न्याय मिला? बिहार और राजस्थान में भी ऐसी कई विसंगतियां हुई हैं. वहां क्या हुआ? त्रिपुरा में वाम मोर्चा शासन के दौरान 10 हजार से अधिक शिक्षकों ने अपनी नौकरी खो दी और भाजपा ने उन्हें बहाल करने का वादा करके सत्ता हासिल की. वहां क्या हुआ? जब बेरोजगारों ने अपनी नौकरी मांगी, तो पुलिस ने उनके सिर पर डंडे बरसाए. ये दोमुंहे सांप हैं. हमेशा याद रखें, एक घायल बाघ हमेशा एक स्वस्थ बाघ से अधिक खतरनाक होता है.
विकास रंजन भट्टाचार्य ने प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री के संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए CPIM के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील विकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा, “योग्य लोग कौन हैं? यह एक साधारण सवाल है जो हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक, हर अदालत इस भ्रष्ट सरकार से पूछती रही है, लेकिन, कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला. वास्तव में, ममता अब जो कर रही हैं, वह योग्य उम्मीदवारों को अपने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के खिलाफ ढाल के रूप में इस्तेमाल करना है. हमें लगता है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने इस बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को सामने ला दिया है और योग्य लोगों को नई भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से अपनी योग्यता साबित करने का विकल्प भी दिया है.