कोरबा:- सरपंचों के निर्वाचन के बाद से ही पंचायत सचिव हड़ताल पर हैं. हालत यह है कि चुनाव जीतने के बाद सरपंच बेकार बैठे हैं, वह सरपंच पद का प्रभार भी नहीं ले सके हैं.
पंचायतों में ग्राम पंचायत के सचिव ही सरपंचों के निर्वाचित होने के बाद, उन्हें प्रभार दिलवाते हैं. अब जब सचिव हड़ताल पर चले गए हैं. तो ज्यादातर सरपंच चुनाव जीतने के बाद भी अपने पद का प्रभार नहीं ले सके हैं. वह किसी भी तरह का काम नहीं कर पा रहे हैं. पंचायतों में विकास की रफ्तार पूरी तरह से थम चुकी है. इन परिस्थितियों में वनांचल क्षेत्र पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक और जिले भर के सरपंच कलेक्ट्रेट पहुंचे थे. कलेक्टर से वैकल्पिक व्यवस्था देने की मांग की है.
लोग रोज आ रहे हैं घर, नहीं कर पा रहे काम :पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के ग्राम पंचायत रामपुर के सरपंच प्रताप सिंह मरावी कहते हैं कि पहले मेरी मां सरपंच थी और अब मैं सरपंच बन चुका हूं. 20 मार्च को निर्वाचन हुआ लेकिन सचिव हड़ताल पर चले गए. मैं प्रभार नहीं ले पाया, मेरी मां सरपंच थी. इसलिए मुझे कामकाज की थोड़ी जानकारी है, लेकिन जो नए सरपंच बने हैं, वह तो किसी आम ग्रामीण की तरह ही हैं. चुनाव जीतकर भी वह पद पर प्रभार नहीं ले पाए. वह किसी भी तरह का काम नहीं कर पा रहे हैं.
20 को चुनाव हुआ, 21 तारीख से ही लोग हमारे घर आ रहे हैं. पूर्व में भी जब सचिवों की हड़ताल होती थी. तब सचिव पद का प्रभार किसी अन्य रोजगार सहायक जैसे पद पर कार्यरत कर्मचारियों को सौंपा जाता था. हमारी मांग है कि इस बार भी इस व्यवस्था को लागू कर सचिव पद का प्रभार किसी अन्य कर्मचारियों को दिया जाए .-प्रताप सिंह मरावी, सरपंच
सचिवों के हड़ताल पर चले जाने के कारण गांव में कुछ भी काम नहीं हो पा रहा है. छोटे-छोटे काम के लिए भी हम चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं. हमने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है कि सचिव पद का प्रभार किसी न किसी व्यक्ति को दिया जाए.-चंद्रकला पोर्ते, सरपंच
ज्यादातर सरपंचों ने नहीं लिया प्रभार :सरपंच सहेत्तर सिंह राज का कहना है कि ज्यादातर सरपंचों ने पद का प्रभार नहीं लिया है. मुश्किल से 10 से 15 सरपंच ऐसे हैं जिन्हें प्रभार मिला है. जबकि ज्यादातर सरपंचों को प्रभार नहीं मिल पाया है, फिर चाहे वह मूलभूत राशि के कार्य हो, छोटे-मोटे नाली या सड़क निर्माण या कोई भी विकास कार्य हो. लोग सरपंचों से उम्मीद करते हैं. उनसे काम करने की बात कहते हैं. लोग रोज हमारे घर पहुंच रहे हैं. लेकिन हम उनके कोई काम कर ही नहीं पा रहे हैं. कलेक्टर से हम मांग करते हैं कि हमें वैकल्पिक व्यवस्था दी जाए. ताकि पंचायत में जो विकास की रफ्तार थम गई है. उसे गति दी जा सके.