नई दिल्ली:– आज 10 अप्रैल को पूरे देशभर में महावीर जयंती मनाई जा रही है महावीर जयंती जैन धर्म का प्रमुख त्योहार है। यह जयंती हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाई जाती है। जैसा कि आप जानते हैं कि भारत विविधता से भरा हुआ देश है जहां हर धर्म के पर्व और त्योहारों को पूरे श्रद्धा-भाव के साथ मनाया जाता है।
इन्हीं महत्वपूर्ण पर्वों में एक है महावीर जयंती, जो विशेष रूप से जैन धर्म के अनुयायियों द्वारा मनाया जाता है। भगवान महावीर ने अपने जीवन में जो शिक्षाएं दीं, वे आज भी समाज को नैतिकता, करुणा और अहिंसा की राह पर चलने का प्रेरणा देती हैं।
अपने उपदेशों के माध्यम से महावीर स्वामी ने लोगों को अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह जैसे सिद्धांतों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी। इन सिद्धांतों को पंच महाव्रत कहा जाता है, जो जैन धर्म के मूल आधार हैं। आज भी महावीर स्वामी के विचार हमें आत्मानुशासन, संयम और सदाचार का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देते हैं। आइए जानते हैं भगवान महावीर के कुछ प्रेरणादायक एवं अनमोल विचार।
जानिए भगवान महावीर के प्रेरणादायक एवं अनमोल विचार :
हर जीव स्वतंत्र होता है। वह किसी अन्य पर निर्भर नहीं करता।
आत्मा की सबसे बड़ी भूल यही होती है कि वह अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान नहीं पाती। यह ज्ञान केवल आत्मबोध से ही संभव है।
सच्ची अहिंसा वही है जिसमें शांति और आत्मसंयम का समावेश हो।
बाहरी दुनिया में कोई शत्रु नहीं होता, हमारे भीतर मौजूद क्रोध, लोभ, घृणा, अहंकार और मोह ही असली शत्रु हैं।
खुद पर विजय पाना, लाखों बाहरी शत्रुओं पर जीत हासिल करने से कहीं अधिक मूल्यवान होता है।
ईश्वर कोई बाहरी सत्ता नहीं है, बल्कि हर व्यक्ति अपने आत्मबल और सही दिशा में किए गए प्रयासों से दिव्यता प्राप्त कर सकता है।
जीवन की कठिनाइयों के लिए कोई और जिम्मेदार नहीं होता, हमारे दुख हमारे खुद के दोषों से उपजते हैं। जब हम अपनी गलतियों को सुधारते हैं, तभी सुख की ओर अग्रसर होते हैं।
घृणा न सिर्फ स्वयं को दुख देती है, बल्कि दूसरों को भी कष्ट पहुंचाती है। करुणा और दया ही हमें सच्चे मानव बनाती है।
यदि आपने किसी के साथ भलाई की है, तो उसे भूल जाना चाहिए। और यदि किसी ने आपके साथ बुरा किया है, तो उसे भी माफ कर आगे बढ़ना ही शांति का मार्ग है।
आत्मा इस संसार में अकेली आती है और अकेली ही चली जाती है, न कोई सगा होता है, न कोई सच्चा साथी।
आत्मा अपने आप में पूर्ण है, उसमें ज्ञान, आनंद और शक्ति निहित होती है। असली सुख बाहरी नहीं, भीतर से उपजता है।
हर जीव का सम्मान करना और उसके अस्तित्व को स्वीकारना ही सच्ची अहिंसा है।
