नई दिल्ली:– डिजिटल और सबसे तेज दौड़ती टेक्नोलॉजी के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी यानि AI का प्रभाव सबसे तेज देखने के लिए मिल रहा है। AI की मदद से दुनिया के सारे काम बड़े आसानी से पूरे हो रहे है जिसके लिए पहले मानव शक्ति बड़ी मेहनत से काम करती रही है। AI का इस्तेमाल पढ़ाई से लेकर दैनिक जीवन के कई कामकाज के लिए होता है लेकिन एक खबर से आप चौंक जाएंगे।
यहां पर आर्टीफिशियल इंटेलिजेंसी अब बच्चे पैदा करने के काम आ रही है, जी हां हाल ही में एआई की मदद से दुनिया का पहला बच्चा पैदा हुआ है और वह भी स्वस्थ है। इस कमाल के लिए कौन सा IVF ट्रीटमेंट काम करता है और एआई की मदद से कितना उन्नत है चलिए जानते है…
कैसे हुआ AI की मदद से फर्टिलाइजेशन
यहां पर बच्चे पैदा करने की उन्नत तकनीक के बीच AI की मदद से नया आईवीएफ सिस्टम सेट का इस्तेमाल हुआ था। पारंपरिक मैनुअल IVF तकनीक को बदलती यह प्रक्रिया इंट्रासाइटोप्लाजमिक स्पर्म इंजेक्शन (आईसीएसआई) का सिस्टम है। इस नए आईवीएफ ट्रीटमेंट में आम विधि की तरह ही एक स्पर्म को सीधे अंडे में इंजेक्ट किया जाता है। इसमें बिना किसी मानव शक्ति की मदद से आईसीएसआई प्रक्रिया के सभी 23 स्टेप्स फॉलो किए जाते है ताकि डिलीवरी की प्रक्रिया आसानी से हो पाएं। इस खास तरह की प्रक्रिया को AI या रिमोट डिजिटल कंट्रोल के माध्यम से पूरा किया जाता है।
जानिए कैसे चुना गया सही भ्रूण
आपको बताते चलें कि, अमेरिका में एआई के इस्तेमाल से बच्चा डिलीवर हुआ है। यहां की एक फर्टिलिटी क्लीनिक में AI टेक्नोलॉजी की मदद से सर्वश्रेष्ठ भ्रूण का चुनाव किया गया। बताया जा रहा है कि, IVF में कई भ्रूण बनाए जाते हैं, लेकिन यह चुनना बहुत मुश्किल होता है कि कौन सा भ्रूण सबसे स्वस्थ और सफल गर्भधारण कर पाएगा। यहां AI एल्गोरिद्म का इस्तेमाल करते हुए माइक्रोस्कोपिक इमेजेस का विश्लेषण किया गया इसके तरह एक सही भ्रूण की पहचान हो सकी।
जानिए कितना फायदेमंद है एआई वाला IVF
आपको बताते चलें कि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी तकनीक के इस्तेमाल से भ्रूण की ग्रोथ, सेल्स के विभाजन की गति और अन्य बायोलॉजिकल संकेतों को स्कोर किया। इसके अनुसार, IVF की सफलता दर पहले से कहीं बेहतर हो गई। पारंपरिक आईवीएफ की प्रक्रिया खास तौर से उबाऊ और थका देने वाली होती है लेकिन एआई की मदद से आईवीएफ की यह प्रक्रिया आसान हुई है। यहां पर AI ने इस प्रोसेस को तेज और सटीक बनाकर समय और पैसे दोनों बचाए। यह तकनीक कितनी सफल एक- दो ऐसे ही मामले सामने आने के बाद स्पष्ट हो सकेगा।
