मुलुगुः भारत सरकार द्वारा नक्सल प्रभावित इलाकों में चलाए जा रहे सघन अभियान और पुनर्वास नीति का असर अब जमीन पर दिखने लगा है. तेलंगाना के मुलुगु जिले में प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) के 22 सक्रिय माओवादियों ने हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया. यह आत्मसमर्पण “युद्ध से बेहतर है घर… अपने गांव लौटो” नामक पहल के तहत हुआ, जिसका मकसद हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ने वाले माओवादियों को समाज में सम्मानपूर्वक पुनः स्थापित करना है.
मुलुगु जिले के एसपी डॉ. शबरीश के सामने माओवादियों ने शुक्रवार को आत्मसमर्पण किया. एसपी डॉ. शबरीश ने आश्वासन दिया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी लोगों को सरकारी पुनर्वास योजनाओं का लाभ दिया जाएगा. एसपी ने जो नक्सली अभी भी छिपे हुए हैं, उनसे समाज की मुख्य धारा में लौटने की अपील की. इस कार्यक्रम में एटुरूनगरम के एएसपी शिवम उपाध्याय, सीआरपीएफ पीएमजी पंचमीलाल, डीएसपी एन. रविंदर सहित अन्य पुलिस अधिकारी शामिल हुए.
आत्मसमर्पण करने वालों में वेंकटपुरम मंडल के याकन्नागुडेनी से एरिया कमेटी सदस्य (एसीएम) मदवी मासा, छत्तीसगढ़ का मुचाकी जोगाराम, तुम्मिरिगुडा से थाती जोगा और पार्टी कैडर सदस्य पूनेम सुक्कू शामिल है. जनताना सरकार समिति के अध्यक्ष कोरम पापा राव और रौथु हनुमाय्या, हनुमा मदावी, वेट्टी वेंकन्ना, मसा सोदी, मदाकम देवा, मदावी जोगा, बिराबोयना नारायण, सोदी मसु, डूडी जयराम, मज्जी विजय और श्योरिटी रवन्ना सहित कई अन्य लोगों ने भी आत्मसमर्पण किया. कोठाकोंडा मज्जी हैमवती, कल्लूरी शांता, कल्लूरी थिरुपतम्मा, मज्जी नागरत्न, मज्जी थिरुपतम्मा और मज्जी सुशीला जैसी महिला माओवादी भी नागरिक जीवन में लौटने का फैसला किया.
बता दें कि केंद्र सरकार ने मार्च 2026 तक भारत से नक्सलवादियों को खत्म करने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए नक्सल प्रभावित इलाके में केंद्र सरकार सिविक एक्शन प्रोग्राम चलाती है. जिसमें स्थानीय लोगों के कल्याण के लिए चिकित्सा शिविर, कौशल विकास जैसे विभिन्न नागरिक गतिविधियां शामिल हैं. इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय आबादी को वामपंथी उग्रवादियों के प्रभाव से दूर रखना होता है. केंद्र सरकार ने इस योजना के मद में 2014-15 से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को 196.23 करोड़ रुपये जारी किए हैं.
