नई दिल्ली:– आपने सुना और देखा होगा कि मोती सीपों से मिलते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ख़ास तरह का मोती होता है जो पेड़ों से भी मिलता है, जी हां बात हो रही है वैजयंती के पौधे की जिससे एक ख़ास तरह का मोती मिलता है जिससे माला भी बनाई जाती है. कहा जाता है कि ये माला ना सिर्फ भगवान श्रीकृष्ण को पसंद है, बल्कि इस पौधे के मोती आपकी किस्मत भी रातों-रात बदल सकते हैं.
नर्सरी के लिए मशहूर रामविलास :हरियाणा कृषि के क्षेत्र में देश भर में अपनी अलग पहचान रखता है क्योंकि यहां के किसान और वैज्ञानिक कृषि के क्षेत्र में नए-नए प्रयोग करके उसको मुनाफे का सौदा बना रहे हैं. उन्हीं में से एक किसान रामविलास सिंह है जो अनोखे प्रकार से नर्सरी तैयार करके लाखों रुपए कमा रहे हैं और ये हरियाणा के एकमात्र ऐसे किसान है जो हजारों प्रकार के फूलों की वैरायटी तैयार करते हैं और देश के अलग-अलग राज्यों में लोगों तक और किसानों तक पहुंचाने का काम करते हैं. इन्होंने अपनी नर्सरी में सैकड़ों प्रकार के पेड़ पौधे लगाए हुए हैं. साथ ही उन्होंने वैजयंती का पौधा भी अपने फार्म की नर्सरी में लगाया है.
वैजयंती की मोती से बनाई जाती है माला :रामविलास सिंह ने अपनी नर्सरी में लगाए वैजयंती के पौधे के बारे में बताते हुए कहा कि ये काफी ज्यादा गुणकारी होता है और घर में इसे लगाना काफी अच्छा माना जाता है. सदियों से ये पौधा हमारे देश में है लेकिन किसानों को इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है. इसलिए इसकी खेती बड़े स्तर पर नहीं की जाती है. वहीं वैजयंती के पौधों से मिलने वाले मोतियों से माला बनाई जाती है और आधायात्मिक तौर पर इसकी माला की काफी ज्यादा मांग है.
वैजयंती की माला की अच्छी-ख़ासी डिमांड :रामविलास ने बताया कि वैजयंती की माला को शरीर के लिए भी अच्छा माना जाता है. कहा जाता है कि इससे बीपी, डायबिटिज़ समेत कई बीमारियों में लाभ मिलता है. इसलिए इस मोती की काफी डिमांड होती है और जो धार्मिक क्षेत्र है, वहां पर इसकी माला बेची जाती है और लोग खूब खरीदारी करते हैं. वैजयंती की माला ₹500 से लेकर हजारों रुपए तक की हो सकती है. उन्होंने बताया कि वैजयंती के नाम पर कुछ नकली मोती भी बेचे जा रहे हैं लेकिन इस पौधे से हमें असली मोती घर में ही मिल सकते हैं.
घरवालों ने पूछे थे सवाल :रामविलास ने बताया कि उन्होंने वैजयंती के बारे में काफी कुछ सुना और पढ़ा हुआ था. उन्होंने कहा कि इस ख़ास पौधे के बारे में पढ़ने के बाद उनके मन में भी इच्छा जगी कि वे इस पौधे को लेकर आएं और अपनी नर्सरी में लगाएं. जब वे इसे अपनी नर्सरी के लिए लेकर आएं तो घरवालों ने कहा कि ये तो मक्के जैसा दिखाई देता है, इससे भला मोती कहां मिलेंगे. लेकिन पहले ही साल में इस पौधे पर मोती आने शुरू हो गए और अब वे दूसरे आम लोगों को और किसानों को इसके पौधे और बीज उपलब्ध करवा रहे हें.
3 से चार महीने में फूल आते हैं : रामविलास ने बताया कि वैजयंती का पौधा एक बार लगाया जाता है और उसमें लगाने के तीन-चार महीने बाद फूल आना शुरू हो जाते हैं और फिर उसमें मोती बन जाते हैं. पौधे की जिस शाखा से हमें मोती मिलते हैं, वो सूख जाता है.
वैजयंती के पौधे से कितने मोती मिलते हैं ? : उन्होंने बताया कि पहले साल हम पौधे से 500 मोती तक ले सकते हैं लेकिन दूसरे साल से हम हजारों की संख्या में मोती ले सकते हैं और जहां पर धार्मिक स्थान है, वहां पर इसकी माला की काफी डिमांड रहती है और वहां पर अच्छे दाम पर हम मोती बेच सकते हैं.
वैजयंती के पौधे को कैल्शियम की जरूरत :उन्होंने बताया कि इस पौधे की ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती. हालांकि इसमें साल में एक बार कैल्शियम जरूर डाला जाता है, क्योंकि कैल्शियम से ही मोती मजबूत बनते हैं जो सालों-साल चलते हैं. उन्होंने खुद अपने पौधे से प्राप्त हुए मोती से माला बनाई और खुद भी पहनी हुई है.
मोती के अंदर पहले से ही होता है सुराख़ :इस मोती की खास बात ये होती है कि पौधे से निकलने के बाद ऊपर का हिस्सा उतरने से ये बिलकुल चमकीला दिखाई देता है और इस मोती में सीप से मिलने वाले दूसरे मोती की तरह सुराख करने की आवश्यकता नहीं होती. इसमें प्रकृति ने नेचुरल तरीके से सुराख़ किया हुआ होता है, जिससे आसानी से माला बनाई जाती है.
लाखों रुपए कमा सकते हैं :रामविलास ने बताया कि ज्यादातर लोगों को वैजयंती के पौधे के बारे में जानकारी नहीं होती है. जिन लोगों को इसकी जानकारी है, वे इसे अपने घरों में जरूर रखते हैं क्योंकि ये बहुत शुभ पौधा माना जाता है और भगवान श्री कृष्ण का भी प्रिय पौधा माना गया है. वहीं हमारे किसान भाई इन पौधों के जरिए सालाना लाखों रुपए भी कमा सकते हैं.
फूल के भी मिलते हैं अच्छे दाम :उन्होंने बताया कि इसका मोती बनने से पहले जो इसके ऊपर फूल आते हैं, वे भी अच्छे दामों पर बेचे जाते हैं जो सजावट और रंग बनाने के काम आते हैं. रामविलास ने कहा कि मोती और फूलों के जरिए किसान भाई अपनी किस्मत भी रातों-रात इस शुभ पौधे के जरिए बदल सकते हैं.
कितने के मिलते हैं वैजयंती के पौधे के बीज ? :रामविलास ने जानकारी देते हुए बताया कि जो भी किसान भाई या आम शख्स इस पौधे को अपने घर या खेत में लगाना चाहता है, वो बड़ी ही आसानी से इस खरीद सकता है. उन्होंने कहा कि 100 रुपए में इस पौधे के करीब 30 बीज उनकी तरफ से दिए जाते हैं. बाकी मार्केट में अलग-अलग रेट पर भी इसके बीज या पौधा कोई भी शख्स आसानी से खरीद सकता है.
दुर्भाग्य दूर होता है :वहीं करनाल के रहने वाले पंडित विश्वनाथ ने बताया कि अगर कोई शख्स इस पौधे को घर में लगाता है तो उसका दुर्भाग्य दूर हो जाता है क्योंकि घर में इस पौधे के होने से घर में साक्षात मां लक्ष्मी का वास हो जाता है. जीवन में फिर धन, सुख और समृद्धि की कोई कमी नहीं रहती है.
समस्याओं का करती है समाधान :पंडित विश्वनाथ ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र में वैसे तो रुद्राक्ष और तुलसी की माला को महत्व दिया गया है, लेकिन वैजयंती की माला को विशेष रूप से पूजा-पाठ और जीवन में आ रही की समस्याओं के समाधान के लिए इस्तेमाल किया गया है.
शुभ मानी जाती है वैजयंती की माला :पंडित विश्वनाथ ने वैजयंती के मोती की माला के बारे में बताते हुए कहा कि वैजयंती के मोती की माला भगवान श्री कृष्ण, भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को पसंद है और इतना ही नहीं गुरु नानक देव जी भी अपने हाथ में वैजयंती के मोती से बनी हुई माला रखते थे.
घर में खुशियां छा जाती है :पंडित विश्वनाथ ने बताया कि इस माला को पहनने से जातक की आर्थिक स्थिति बेहतर हो जाती है. खुशियों का घर में वास हो जाता है. इसके अलावा इस माला को पहनने वाले शख्स का बुरी नज़र से भी बचाव होता है.
निगेटिविटी दूर होती है :पंडित विश्वनाथ के मुताबिक वैजयंती के मोतियों की माला पहनने से घर की निगेटिविटी पूरी तरह से दूर हो जाती है. वैजयंती के माला को धारण करने वाले व्यक्ति के अंदर सकारात्मक ऊर्जा रहती है. नकारात्मक ऊर्जा उससे दूर हो जाती है. माला से जहां मानसिक सुकून मिलता है, वहीं हर काम में सफलता और सम्मान भी प्राप्त होता है. वहीं इस माला को पहनने से व्यक्ति का आत्मविश्वास भी बढ़ता है और फिर हर काम में सफलता मिलने लगती है.
घर में नहीं होगी धन की कमी :पंडित विश्वनाथ ने बताया कि वैजयंती की माला पहनने से घर में धन-धान्य की कमी नहीं रहती है. भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पसंदीदा माला अगर आपके पास होगी तो कार्यक्षेत्र में व्यक्ति को सफलता हासिल होती है.
एकाग्रता बढ़ती है :पंडित विश्वनाथ ने बताया कि वैजयंती माला धारण करने से एकाग्रता बढ़ती है और इंसान अपने कार्यक्षेत्र में सफलता हासिल कर सकता है.
राधा ने श्रीकृष्ण को पहनाई थी माला :पंडित विश्वनाथ ने बताया कि सनातन धर्म में कहा गया है कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने पहली बार राधा और सखियों के साथ रासलीली खेली थी, तब राधा ने उन्हें वैजयंती की माला पहनाई थी. उन्होंने बताया कि वैजयंती की माला को ज्यादातर आध्यात्मिक तौर पर ही धारण किया जाता है. ये काफी ज्यादा शुभ मानी जाती है.
भगवान श्रीकृष्ण को प्रिय है वैजयंती माला :पंडित विश्वनाथ ने बताया कि वैजयंती की माला भगवान श्री कृष्ण की प्रिय वस्तुओं में से एक है. भगवान श्री कृष्ण की छह मुख्य प्रिय वस्तु है, जिसमें गाय, मोर पंख ,बांसुरी ,मिश्री, माखन और वैजयंती माला भी शामिल है. ऐसा माना जाता है कि भगवान श्री कृष्णा वैजयंती माला को अपने गले में भी धारण किया करते थे जो धार्मिक और शास्त्रों के हिसाब से काफी शुभ मानी जाती है. इसका विशेष तौर पर इस्तेमाल हवन, यज्ञ, पूजा और सात्विक साधनों में किया जाता है. वैजयंती का अर्थ होता है विजय दिलाने वाली माला मतलब वो हर काम में विजय दिलाने वाली होती है इसलिए इसको ज्यादातर लोग धारण करते हैं.
वैजयंती के मोतियों की माला से जुड़ी कथा :पंडित विश्वनाथ ने बताया कि पौराणिक कथाओं में कहा गया है कि एक बार इंद्र ने अहंकार में आकर वैजयंती की माला का अपमान कर दिया था तो महालक्ष्मी उनसे रुष्ट हो गई थी और उन्हें दर-दर भटकना पड़ा था. दरअसल हुआ कुछ यूं था कि एक बार देवराज इंद्र अपने हाथी ऐरावत पर बैठकर घूमने के लिए निकले थे. तभी मार्ग में उनकी भेंट महर्षि दुर्वासा से हो गई. उन्होंने इंद्र को अपने गले से वैजयंती की माला उतारकर भेंटस्वरूप दे दिया था. इंद्र ने अभिमानवश उस पुष्पमाला को ऐरावत के गले में डाल दिया और फिर ऐरावत ने उसे अपने पैरों तले रौंद डाला. अपनी भेंट के अपमान से महर्षि दुर्वासा ने देवराज इंद्र को लक्ष्मीहीन होने का श्राप दे डाला था.
कैसे पहननी चाहिए वैजयंती की माला ? :उन्होंने कहा कि वैजयंती की माला पहनने से सौभाग्य, मान सम्मान में वृद्धि होती है. मानसिक शांति मिलती है. अगर बात करें माला को गले में धारण करने की तो इसे सोमवार या शुक्रवार को गंगाजल/शुद्ध ताज़े जल से धोने के बाद पहनना चाहिए. अगर पुष्य नक्षत्र में वैजयंती के मोतियों की माला धारण की जाए तो ये बहुत ही फलदायक होती है और व्यक्ति की हर तरह की मनोकामना को पूरी करती है.
वैजयंती की माला से जाप :पंडित विश्वनाथ ने बताया कि वैजयंती की माला को जाप के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. कहा जाता है कि रोज़ाना इस माला से अगर अपने ईष्ट देव का जाप किया जाए तो ये जीवन में नई शक्ति का संचार करती है. चूंकि भगवान विष्णु को ये माला सबसे ज्यादा प्रिय होती है, ऐसे में वैजयंती माला से ‘ऊं नमः भगवते वासुदेवाय’ का मंत्र जाप करने से लोगों को मनचाहा फल मिलता है. साथ ही विवाह में आ रही सारी बाधाएं भी दूर हो जाती हैं. वैजयंती के मोतियों की माला के साथ भगवान विष्णु या सूर्यदेव की उपासना करने से ग्रह नक्षत्रों का अशुभ प्रभाव नष्ट हो जाता है. यहां तक कि शनि के दोष की भी समाप्ति हो जाती है.
