नई दिल्ली :- हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे हंसते-खेलते और दौड़ते-भागते रहें. लेकिन कई बार हाइपर एक्टिव बच्चे को कंट्रोल करना या टेकल करना बड़ा मुश्किल हो जाता है. ऐसे बच्चों को कंट्रोल करने वाले पेरैंट्स कई बार बच्चों को जोर-जबरदस्ती से संभालने की या फिर उन्हें हमेशा सही करने की कोशिश में लगे रहते हैं. पर आपकी ये तकनीक बच्चों को कंट्रोल करने के बजाए उन्हें और विद्रोही या उग्र बना सकती है. आइए समझते हैं हेल्थ एक्सपर्ट्स से कि हाइपरएक्टिव बच्चों को कैसे संभालें और माता-पिता को उनके साथ जो चीजें कभी नहीं करनी चाहिए.
क्या होती है हाइपरएक्टिविटी: जब बच्चा बहुत ज्यादा भागदौड़ करता है, एक जगह टिककर नहीं बैठता, बार-बार चीजें छूता है, चुप नहीं रहता और हर समय कुछ न कुछ करता रहता है, तो ऐसे बच्चे को हाइपरएक्टिव कहा जाता है. ये बच्चे आमतौर पर से भी जुड़े हो सकते हैं, लेकिन हर चंचल बच्चा बीमार नहीं होता. बच्चों की ये चंचलता बहुत अच्छी लगती है लेकिन कई बार पेरैंट्स ऐसे बच्चों को संभालने में कुछ गलतियां कर देते हैं.
पेरैंटिंग एक्सपर्ट डॉ. अनिल योगी और ऋतु अपने इंस्टाग्राम पर बताते हैं कि ऐसे बच्चों को संभालते हुए माता-पिता को कुछ गलतियां बिलकुल नहीं करनी चाहिए.
- जब भी घर में रिश्तेदार आते हैं, तो बच्चों के लिए चिप्स, कोल्ड्रिंक या चॉकलेट जैसी चीजें लाते हैं. माता-पिता भी बच्चों को प्यार जताने के लिए यही देते हैं. लेकिन हाइपरएक्टिव बच्चों को चिप्स, कोल्ड ड्रिंक या फास्ट फूड जैसी चीजें खाने के लिए नहीं देनी चाहिए. जंक फूड में मौजूद ज्यादा शुगर, नमक और प्रिजर्वेटिव दिमाग को बहुत ही ओवरएक्टिव कर देते हैं.
- आजकल बच्चों का स्क्रीन टाइम बहुत ज्यादा बढ़ रहा है. लेकिन हाइपरएक्टिव बच्चों को मोबाइल, टीवी और वीडियो गेम जैसे स्क्रीन्स से दूर रखना चाहिए. स्क्रीन की तेज लाइट और आवाज उनके मस्तिष्क को शांत नहीं होने देती. इससे जरूर बचना चाहिए.
- बच्चों के लिए एक रुटीन होना बहुत जरूरी है. हर दिन का एक समय तय करें, खेलने, पढ़ने, खाने और सोने का. इससे बच्चा अनुशासित होगा और उसकी ऊर्जा सही दिशा में लगेगी. याद रखिए अगर रुटीन नहीं होगा, डिसिप्लेन नहीं होगा तो बच्चों का व्यवहार भी कंट्रोल नहीं होगा.
- पेरैंट्स सबसे बड़ी गलती करते हैं, बच्चों को डांट-डपट कर. याद रखें बच्चे को बार-बार डांटना या चिल्लाना बंद करें. आपकी तेज आवाज और आपका डांटना बच्चों के भीतर असुरक्षा और विद्रोह पैदा करता है. शांत वातावरण में बच्चा खुद भी शांत महसूस करता है. बल्कि पॉजिटिव बातों पर फोकस करें. अगर वो कुछ अच्छा करे तो उसकी तारीफ करें.
- कोरोना के बाद अक्सर बच्चों को माता-पिता घर में ही रखते थे. बिजी शेड्यूल के चलते भी अक्सर बच्चे घरों में ही बंद रहते हैं. लेकिन यही उनके उग्र व्यवहार को भी बढ़ाता है. बच्चों की एनर्जी का इस्तेमाल करने के लिए फिजिकल एक्टिविटीज बहुत जरूरी है. हाइपरएक्टिव बच्चे में बहुत ऊर्जा होती है और उसे घर में रहकर नहीं इस्तेमाल किया जा सकता. इसलिए आउटडोर एक्टिविटी बहुत जरूरी है.
