नई दिल्ली :- वैशाख अमावस्या का पर्व 27 अप्रैल 2025 को है. इस दिन अपने पितरों के लिए श्राद्ध करते हैं, जिससे कि उनको तृप्ति मिल सके. वैशाख अमावस्या को प्रात:काल में स्नान करने के बाद पितरों को तर्पण देते हैं, उसके बाद श्राद्ध कर्म करते हैं. यदि आपको वैशाख अमावस्या के अवसर पर पितरों के लिए श्राद्ध करना है तो उससे जुड़े कुछ नियमों के बारे में जानकारी होनी चाहिए. आइए अंत्यकर्म श्राद्धप्रकाश से जानते हैं श्राद्ध के नियमों के बारे में.
श्राद्ध करने के नियम
- श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को कुश, नेपाली कंबल, रेशम, घास, लकड़ी के आसन का उपयोग करना चाहिए. लकड़ी में भी शमी, जामुन, आम, मौलसिरी, कदंब के आसन उत्तम माने जाते हैं, लेकिन इसमें भी ध्यान रखना होगा कि उसमें लोहे वाली कील न लगी हो.
- श्राद्ध में पितरों के लिए पिंड बनाने में 8 सामग्री का उपयोग करना चाहिए. तिल, अन्न, पानी, शहद, धूप, दीप, दूध और घी के उपयोग से पिंड बनाते हैं.
- मासिक या फिर वार्षिक श्राद्ध में पितरों के लिए नारियल के फल के बराबर पिंड बनान चाहिए. तीर्थ स्थान या दर्श श्राद्ध में मुर्गी के अंडे के बराबर पिंड बनाते हैं, वहीं गया और पितृ पक्ष में आंवले के बराबर पिंड बनाना चाहिए.
- श्राद्ध के समय में सोने, चांदी, तांबे या कांसे के बर्तन का उपयोग करें. ये न हो तो पलाश या अन्य पेड़ों के पत्तों का उपयोग करते हैं. केले के पत्ते का उपयोग वर्जित है. पितरों के लिए श्राद्ध का भोजन मिट्टी के बर्तन में नहीं रखना चाहिए.
- श्राद्ध के दौरान ब्राह्मणों को बैठाकर उनके पैर धोने चाहिए. खड़े करके पैर धोने से पितर निराश होंगे. इस समय पत्नी को दाहिने खड़ा करते हैं. पत्नी के बाएं रहकर जल गिराने से श्राद्ध आसुरी माना जाता है. वह पितरों को नहीं मिलता है.
- श्राद्ध के दिन श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को दातुन करना, पान खाना, तेल लगाना, व्रत रखना, महिला से सहवास करना वर्जित है. दूसरे का भोजन नहीं करना चाहिए.
- श्राद्ध में लोहे के बर्तन का उपयोग नहीं करना चाहिए. यह पूर्णतया वर्जित है. इस दिन लोहे के दर्शन मात्र से ही पितर वापस लौट जाते हैं.
- श्राद्ध के वक्त कदंब, बेलपत्र, केवड़ा, मौलसिरी, लाल और काले रंग के फूलों का उपयोग नहीं करते हैं. तेज गंध या गंध रहित फूल भी वर्जित हैं.
- श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को मसूर, बैंगन, अरहर, गाजर, गोल लौकी, शलगम, प्याज, लहसुन, हींग, जीरा, काला नमक, जामुन, पिप्पली, सिंघाड़ा, कैथ, महुआ, अलसी, चना आदि खाना वर्जित है.
- श्राद्ध के समय में मांस खाना या मांस देना सर्वथा वर्जित है.
