नई दिल्ली:– भारत में महिलाएं धर्म और आस्था से जुड़ी कई बातों को लेकर हमेशा से संवेदनशील रही हैं. खासकर जब बात पूजा-पाठ या तीर्थयात्रा की हो, तो महिलाओं के मन में कई सवाल उठते हैं. ऐसा ही एक सवाल हैअगर किसी महिला को तीर्थयात्रा के समय मासिक धर्म (पीरियड) आ जाए तो क्या उसे भगवान के दर्शन करने चाहिए या नहीं?
इस विषय पर हाल ही में वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने एक महिला के सवाल का जवाब दिया. यह बातचीत सोशल मीडिया पर bhajanmarg_official नाम के पेज पर भी साझा की गई है, जिससे यह चर्चा और अधिक लोगों तक पहुंची.
महिला ने क्या पूछा था?
भक्तों की सभा में एक महिला ने प्रेमानंद महाराज से पूछा, “जब हम महिलाएं बहुत मन से तीर्थ यात्रा पर जाती हैं और उस दौरान पीरियड आ जाते हैं, तो क्या हमें दर्शन करने चाहिए या रुक जाना चाहिए?” उन्होंने कहा कि यह स्थिति बहुत उलझन वाली होती है क्योंकि बहुत मेहनत और खर्च के बाद ही कोई तीर्थ पर पहुंच पाता है.
प्रेमानंद महाराज ने क्या जवाब दिया?
प्रेमानंद जी ने बड़ी ही सहजता से जवाब दिया कि दर्शन करने का सौभाग्य नहीं छोड़ना चाहिए. मासिक धर्म कोई गंदगी या पाप नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है. तीर्थस्थान तक पहुंचना बहुत कठिन होता है समय, पैसा और मेहनत लगती है. ऐसे में भगवान के दर्शन से वंचित नहीं रहना चाहिए.
क्या सावधानी रखनी चाहिए?
महाराज ने यह भी बताया कि इस दौरान महिलाएं स्नान करके, साफ कपड़े पहनकर और भगवत प्रसादी चंदन लगाकर दूर से दर्शन कर सकती हैं. इस समय वे मंदिर की सेवा, पूजा-सामग्री चढ़ाना या मूर्ति को छूने जैसे कार्य न करें तो बेहतर है. केवल मन से प्रभु को याद करें और दर्शन करें.
