कोरबा:- ऊर्जाधानी में मेडिकल कॉलेज खुलने के बाद NMC (राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग) ने अब यहां इंटर्नशिप को भी हरी झंडी दे दी है. एमबीबीएस का कठिन कोर्स पूरा कर इसे पास करने वाले नई नवेले डॉक्टर अब कॉलेज के अधीनस्थ रहकर इंटर्नशिप पूरा कर सकेंगे. पहले वर्ष मेडिकल कॉलेज अस्पताल कोरबा में इस सुविधा का लाभ विदेशों में एमबीबीएस कोर्स पूरा कर स्वदेश लौटने वाले फ्रेश डॉक्टर्स को मिलेगा. इसके लिए डीएमई चिकित्सा शिक्षा निदेशालय से अनुमति लेनी होगी.
मेडिकल कॉलेज अस्पताल का पहला बैच 2026 में पास आउट होगा. इसके पहले इस साल अन्य छात्रों के पास मौका है कि वह कोरबा सेंटर से प्रोग्राम पूरा कर सके. इंटर्नशिप प्रोग्राम शुरू होने से न सिर्फ मेडिकल कॉलेज अस्पताल बल्कि दूर दराज के सरकारी अस्पतालों में भी एमबीबीएस चिकित्सक तैनात होंगे. कम से कम 1 वर्ष के लिए वह दूरस्थ अस्पताल में अपनी सेवाएं देंगे. इंटर्नशिप प्रोग्राम शुरू होने के बाद अब सभी स्थानों पर नए एमबीबीएस चिकित्सक मौजूद रहेंगे. पिछले वाले का एक साल पूरा होगा, तो अगले वर्ष के नए प्रशिक्षण लेने आए चिकित्सक उनका स्थान ले सकेंगे.
अब तक 66 आवेदन मिले : कोरबा मेडिकल कॉलेज शुरू हुए चार साल हो चुके हैं. अगले साल यानि 2026 में एमबीबीएस करने वालों का पहला बैच निकलेगा. कोर्स पूरा करने वाले विद्यार्थियों के लिए एक साल का इंटर्नशीप अनिवार्य होता है. जिसकी तैयारी मेडिकल कालेज प्रबंधन ने कर ली है. कॉलेज में इंटर्नशीप के लिए आवेदन लिया जा रहा है. अब तक 66 विद्यार्थियों ने आवेदन किया है. वर्तमान में आवेदन करने वालों में वे विद्यार्थी शामिल हैं, जिन्होने विदेशों से अपना कोर्स पूरा करने के बाद चिकित्सा शिक्षा निदेशालय की तरफ से आयोजित परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है.
इस साल कोरबा जिले के मेडिकल कॉलेज से कोई भी विद्यार्थी एमबीबीएस पास आउट नहीं हो रहा है. पहला बैच अगले साल पासआउट होगा. जिसके कारण इस वर्ष सभी सीटों पर बाहर के छात्रों को इंटर्नशिप करने का अवसर मिलेगा. जबकि अगले वर्ष से कोरबा से एमबीबीएस करने वाले डॉक्टर कोरबा में इंटर्नशिप करेंगे, उन्हें प्राथमिकता भी दी जाएगी.
इंटर्नशिप के लिए 125 सीट उपलब्ध : इंटर्नशीप के लिए जिले में 125 सीट निर्धारित किए गए हैं. आगामी वर्ष मेडिकल कॉलेज से उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों को निर्धारित सीट के आधार पर प्रशिक्षण की सुविधा दी जाएगी. अगले वर्ष यानी 2026 में पांच प्रतिशत सीट विदेश से एमबीबीएस उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों के लिए आरक्षित रहेंगी. इंटर्नशीप करने के बाद विद्यार्थी सरकारी अस्पताल में सेवा देने के अलावा स्वतंत्र प्रेक्टिस भी कर सकते हैं. इंटर्नशिप के दौरान इस एक वर्ष के अंतराल में प्रशिक्षु डॉक्टर मेडिसिन, सर्जरी, गायनोकोलॉजी, एनेस्थिसिया, शिशु रोग विज्ञान, इएनटी नाक कान गला संबंधी रोगों के इलाज के लिए तैयार किया जाता है.
डॉक्टरों की कमी होगी दूर : कोरबा ही नहीं प्रदेश भर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है. कोरबा जिले में मेडिकल कॉलेज अस्पताल की स्थापना तो हुई है लेकिन अभी यहां डॉक्टर की कमी बनी हुई है. मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ही प्राध्यापक, सह प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, सीनियर रेजिडेंट और जूनियर रेजिडेंट को मिलाकर डॉक्टर के कुल 217 पद स्वीकृत हैं. जबकि अब तक सिर्फ 70 डॉक्टर की ही स्थायी तौर पर नियुक्ति हो सकी है. कुछ डॉक्टर को संविदा और बॉन्ड भरवा कर काम लिया जा रहा है. डॉक्टरों की भारी कमी है. इंटर्नशिप के माध्यम से जब फ्रेश डॉक्टर अपनी सेवाएं देंगे. जिससे डॉक्टरों की कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकेगा.
इंटर्नशिप की अनुमति मिली, नए आवेदन भी मिले : मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षक डॉ गोपाल कंवर ने बताया कि एमबीबीएस कोर्स पूरा करने वाले फ्रेश डॉक्टरअब मेडिकल कॉलेज से इंटर्नशीप कर सकते हैं. इसके लिए प्रवेश की प्रकिया शुरू हो गई है. प्रवेश के लिए डीएमई से अनुमति लेनी होगी. फिलहाल 66 आवेदन मिले हैं. विदेशों से कोर्स पूरा करने वाले विद्यार्थी आवेदन कर रहे हैं. हमारा पहला बैच 2026 में निकलेगा. इंटर्नशिप के लिए डॉक्टर जब अस्पताल में सेवा देंगे, तो डॉक्टर की कमी भी दूर होगी. मरीजों को भी इसका लाभ मिलेगा.
छत्तीसगढ़ में गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज: छत्तीसगढ़ में कुल 11 सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं. 11 सरकारी मेडिकल कॉलेज में 1555 MBBS सीटें है. सबसे पुराना मेडिकल कॉलेज पंडित जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल मेडिकल कॉलेज रायपुर में हैं. जो साल 1963 में बना था. यहां सबसे ज्यादा 230 एमबीबीएस सीटें हैं. उसके बाद छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस बिलासपुर साल 2001 में बना. यहां 150 सीटें है. इसके बाद साल 2006 में बलीराम कश्यप मेमोरियल NDMC मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में बनाया गया.यहां 125 एमबीबीएस सीटें हैं.
साल 2012 में रायपुर एम्स में एमबीबीएस का कोर्स शुरू हुआ. यहां MBBS की 125 सीटें हैं. साल 2013 में प्रदेश में दो मेडिकल कॉलेज बनाए गए. जो रायगढ़ और दुर्ग में बनाया गया. दुर्ग में चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में 200 सीटें हैं. रायगढ़ में लखीराम अग्रवाल मेमोरियल गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में 100 सीटें है. साल 2014 में राजनांदगांव में गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज बनाया गया. यहां 125 सीटें हैं. 2016 में सरगुजा में राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज शुरू हुआ. यहां 125 मेडिकल सीटें हैं. 2016 के बाद पांच साल तक प्रदेश में कोई मेडिकल कॉलेज नहीं खुला. साल 2021 में गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज कांकेर शुरू हुआ. जिसमें 125 सीटें हैं. साल 2022 में कोरबा और महासमुंद में 125-125 सीटों के साथ मेडिकल कॉलेज शुरू हुआ.