नई दिल्ली:– पहलगाम आतंकी हमले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई होगी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच इस पर सुनवाई करेगी। याचिका में पहलगाम हमले की जांच के लिए सर्वोच्च अदालत के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग के गठन की मांग की गई है। इसके साथ ही याचिका में केंद्र, जम्मू कश्मीर, सीआरपीएफ, एनआईए को जम्मू-कश्मीर के टूरिस्ट इलाको में नागरिको की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक्शन प्लान तैयार करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है।
याचिका में आगे कहा गया है कि कोर्ट केंद्र सरकार को निर्देश दे कि वो इस हमले की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एसआईटी गठित करे। याचिकाकर्ताओं में फतेश कुमार शाहू, जम्मू कश्मीर के रहने वाले मोहम्मद जुनैद तथा विक्की कुमार शामिल हैं।
पीएम मोदी ने तीनों सेनाओं को दिया ‘फ्री हैंड’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की सेनाओं को आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने की खुली छूट दे दी है। हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पीएम ने साफ कर दिया कि सेना को जवाबी कार्रवाई का समय, लक्ष्य और तरीका तय करने की पूरी छूट है। उन्होंने कहा कि सेना आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए कोई भी जरूरी कदम उठाने में सक्षम है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सेना, नौसेना और वायुसेना को आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने में किसी भी तरह की बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। यह फैसला पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद लिया गया, जिसमें निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाया गया था। पीएम ने जोर देकर कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर कायम है और सेना इस खतरे को जड़ से खत्म करने के लिए स्वतंत्र है। उन्होंने सेना की क्षमता और समर्पण की सराहना की और कहा कि देश को अपनी सेनाओं पर पूरा भरोसा है।
संदिग्ध गतिविधियों पर नजर
सेना ने जम्मू-कश्मीर में अपनी चौकसी बढ़ा दी है और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। इसके अलावा खुफिया जानकारी के आधार पर आतंकियों के खिलाफ लक्षित अभियान चलाए जाने की संभावना है। बुधवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर और विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है।
इसके बाद कैबिनेट कमेटी ऑन नेशनल सिक्योरिटी (CCS) की बैठक भी हो सकती है, जिसमें आतंकवाद के खिलाफ ठोस रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। CCS की बैठक में सेना की ऑपरेशनल प्लान और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट की समीक्षा की जाएगी। भारत के इस कदम से आतंकिस्तान की हवाइयां उड़ी हुई हैं।
