नई दिल्ली:– अफगानिस्तान की गलियों में आपको कुछ अजीब से मिट्टी के ढेले बिकते दिखेंगे, लेकिन ये असल में अंगूर के पैकेट होते हैं.
इन ढेलों के अंदर छिपे होते हैं रसीले, ताजे और जूसी अंगूर जो महीनों पहले स्टोर किए गए थे.
अंगूरों को भूसे और मिट्टी से बने दो सख्त खोलों में बंद किया जाता है ताकि वो पूरी तरह से सील रहें.
इन पैकेट्स को गड्ढा खोदकर जमीन के अंदर ठंडी जगह पर रख दिया जाता है ताकि बिना फ्रिज के भी ताजगी बनी रहे.
ठंडी मिट्टी का तापमान अंगूरों को खराब होने से बचाता है और वो लंबे समय तक फ्रेश बने रहते हैं.
जब बाजार में अंगूर मिलना बंद हो जाते हैं, तब इन्हें बाहर निकाला जाता है और अच्छे दामों में बेचा जाता है.
मिट्टी का ढेला जैसे ही तोड़ा जाता है, अंदर से एकदम ताजे और जूसी अंगूर निकलते हैं जैसे अभी-अभी तोड़े हों.
इस देसी जुगाड़ की मदद से अंगूर करीब 6 महीने तक खराब नहीं होते और स्वाद भी बरकरार रहता है.
सिर्फ अंगूर ही नहीं, कुछ और फल जैसे सेब वगैरह भी देसी तकनीकों से स्टोर किए जाते हैं.
