सरगुजा:- भीख मांगना सामाजिक बुराई है. सामाजिक बुराई होने के बाद भी कई लोग इस काम को शौकिया तौर पर करते हैं. जैसे ही आप किसी बिजी चौक चौराहे से गुजरेंगे आपको कोई न कोई महिला गोद में बच्चा लिए मिल जाएगी. आपसे नकद पैसों की डिमांड की जाएगी. गोद में सोए बच्चे के भूखे होने का हवाला दिया जाएगा. आपका दिल पसीज जाएगा तो आप कुछ पैसे उसे दे देंगे. लेकिन अगर आपने उसे कुछ खाने को दिया तो वो लेने से इंकार कर देगी. दरअसल सरगुजा में इन दिनों ऐसी महिलाओं की संख्या में इजाफा हो गया है जो भीख मांगने के लिए चौक चौराहों पर डेरा जमाए रहती हैं.
भीख मांगने वालों से शहर के लोग परेशान: सरगुजा में इन दिनों पारा 40 से 45 डिग्री के बीच में चल रहा है. चिलचिलाती धूप में भी भीख मांगने वाली ये महिलाएं गोद में बच्चों के लिए लोगों से जबरन पैसा मांगते मिल जाएंगी. अगर आपने पैसा दे दिया तो ठीक नहीं तो वो काफी दूर तक आपका पीछा करती रहेंगी. कई बार लोग परेशान होकर पैसे देते देते हैं और अपना पिंड छुड़ा लेते हैं. कई लोग महिलाओं की गोद में बच्चे को देखकर पिघल जाते हैं और पैसे दे देते हैं. गलती से अगर आपने कुछ खाने को दे दिया तो वो नहीं लेंगी बल्कि नगद पैसों की ही डिमांड करेंगी. ज्यादातर भीख मांगने वाली महिलाएं हाथ पैरों से दुरुस्त और शरीर से स्वस्थ होती हैं. इसके बावजूद भी वो भीख मांगते रहती हैं.
कई बार तो हम लोगों ने उनको खाने को भी दिया लेकिन उनको नगद पैसे चाहिए. हम लोगों ने कई लोगों को काम भी देने की कोशिश की लेकिन वो काम करने के बजाए भीख मांगना बेहतर समझती हैं. धूप में बच्चों को लेकर सड़क पर भीख मांगती हैं. बच्चों की सेहत पर भी इसका बुरा असर पड़ता है: शिवेश सिंह, स्थानीय निवासी
शासन प्रशासन को चाहिए कि वो ऐसे लोगों पर कार्रवाई करे. हमें नहीं पता कि ये लोग कहां से आते हैं कई बार तो वो अलग अलग बच्चों के साथ भीख मांगते नजर आते हैं. बच्चों का भविष्य और उनकी सेहत से भी ये लोग खिलवाड़ कर रहे हैं. शासन को इसपर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए: नीलेश सिंह, स्थानीय निवासी
भिक्षावृत्ति को लेकर कोई एक कानून अब तक देश मे नही बन सका है. सबसे पुराना कानून बॉम्बे का है जो 1959 में बना. उसे ही अपनाते हुए करीब 22 राज्यों ने अपने यहां इसके खिलाफ कानून बनाए. छत्तीसगढ़ में भिक्षावृत्ति निवारण अधिनियम 1973 मध्य प्रदेश से लिया गया. जबकी बाल संरक्षण अधिनियम में बाल भिक्षावृत्ति के लिये कानून बनाए गए हैं. असल में ये दंड देने का मामला नहीं है, ये एक सामाजिक बुराई है और इसे दूर करने के लिए प्रशासन को कई विभागों को मिलकर प्रयास करना होगा. ऐसे लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था करनी होगी: नवनीकान्त दत्ता, कानूनी सलाहकार, अंबिकापुर
आज के समय में जब तापमान 45 डिग्री सेंटीग्रेट से अधिक है और ऐसे में हम बड़ों को भी कहीं ले जाने में तकलीफ महसूस कर रहे हैं. ऐसे समय में अगर छोटे बच्चों को धूप में ले जाया जा रहा है, वो भी महिलाएं जिन्हें मातृत्व का रूप कहा जाता है, उनके द्वारा बच्चों को धूप में ले जाकर उनके स्वास्थ्य और उनके बालपन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. हमें इसपर संज्ञान लेना होगा. हम अपने विभाग के जरिए सूचना संबंधित विभाग को देकर कार्रवाई करेंगे: वर्णिका शर्मा, अध्यक्ष बाल संरक्षण आयोग
बाल संरक्षण आयोग हुआ सख्त: बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने भरोसा दिलाया है कि वो ऐसे लोगों पर जल्द कार्रवाई करेंगी जो बच्चों को गोद में लेकर भरी गर्मी में भीख मांगती हैं. अब देखना ये होगा कि शासन और प्रशासन कैसे इस सामाजिक बुराई को रोकने का काम करता है और कितना सफल होता है.