नई दिल्ली: – गुरुवार शाम पाकिस्तान ने भारत के कई हिस्सों में ड्रोन, मिसाइल और तोपों से हमले किए. लेकिन भारतीय सेना की सतर्कता के चलते ये सभी हमले नाकाम हो गए. जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान ने ‘हमास स्टाइल’ में एक साथ कई मोर्चों से यह हमला किया. इसका असली मकसद भारत की हवाई सुरक्षा प्रणाली की ताकत परखना था.
दिन में ही रक्षा सूत्रों ने News18 को बताया था कि पाकिस्तान सिर्फ हमला नहीं करना चाहता था, बल्कि भारत के एयर डिफेंस सिस्टम का टेस्ट करना चाहता था. शाम को इस बात की पुष्टि भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी ने भी की.
कर्नल कुरैशी ने बताया कि लगभग 300 से 400 ड्रोन का इस्तेमाल कर 36 स्थानों पर घुसपैठ की कोशिश की गई. उन्होंने बताया कि भारतीय सशस्त्र बलों ने काइनेटिक और नॉन-काइनेटिक हथियारों से कई ड्रोन को मार गिराया. यह हमला बड़े पैमाने पर एयर डिफेंस सिस्टम की टेस्टिंग और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए किया गया था. मलबे की जांच में सामने आया कि कई ड्रोन तुर्की के ‘अस्सिगगार्ड सोंगर’ मॉडल के थे.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की बौखलाहट
भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और POK में 9 आतंकी ठिकानों पर हमले किए थे. यह कार्रवाई 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब थी. इसके बाद पाकिस्तान ने जवाबी हमला करते हुए जम्मू-कश्मीर के पुंछ में गोलाबारी की जिसमें 16 लोगों की मौत हो गई. इसके अलावा पाकिस्तान ने भारत के 15 सैन्य ठिकानों पर हमला करने की कोशिश की लेकिन वह भी असफल रहा. भारत की जवाबी कार्रवाई में लाहौर स्थित पाकिस्तानी एयर सिस्टम को भी नुकसान पहुंचा.
तीन राज्यों में मिसाइल-ड्रोन अटैक, भारत ने दिया करारा जवाब
8 मई की शाम को पाकिस्तान की ओर से जम्मू-कश्मीर, पंजाब और राजस्थान में मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए. इसके जवाब में भारत ने सियालकोट, लाहौर और कराची में ड्रोन से सटीक हमले किए. रक्षा सूत्रों के अनुसार कम से कम 40 से ज्यादा जगहों पर पाकिस्तान ने हमले की कोशिश की. लेकिन इसका उद्देश्य संभवतः यह देखना था कि भारत कहां-कहां इन हमलों का पता लगा सकता है. जहां भारत से जवाबी कार्रवाई हुई, वहां पाकिस्तान जान गया कि एयर डिफेंस सिस्टम मौजूद है. और जहां नहीं हुई वहां की कमजोरी को नोट किया गया. सूत्रों के अनुसार, “ज्यादातर ड्रोन और मिसाइल बिना गोला-बारूद या बहुत कम विस्फोटक के थे. इसका मकसद हमला नहीं बल्कि भारत की निगरानी प्रणाली की ताकत और कमजोरी को आंकना था.”
क्या होता है ऐसा हमला?
इस तरह के सैन्य हमलों को ‘टोही टेस्ट’ कहा जाता है. यह हमला दुश्मन की तैयारियों, सुरक्षा घेरे और उसकी कमज़ोरियों को समझने के लिए किया जाता है. ऐसे ऑपरेशन में छोटी टीमों को भेजकर दुश्मन की प्रतिक्रिया देखी जाती है ताकि भविष्य की बड़ी कार्रवाई की प्लानिंग की जा सके. इस तरह की रणनीति से दुश्मन की तैनाती, हथियार प्रणाली और कमज़ोर क्षेत्रों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है. इन सूचनाओं का उपयोग अगली बड़ी सैन्य योजना में किया जाता है.
