नई दिल्ली:– सीभारत सरकार ने 5925 MHz से 6425 MHz बैंड को ‘डी-लाइसेंस’ (de-license) करने का ड्राफ्ट जारी कर दिया है, जिससे अब इस स्पेक्ट्रम का उपयोग बिना लाइसेंस शुल्क चुकाए किया जा सकेगा. यह कदम भारत में अगली पीढ़ी की तकनीकों जैसे AI, रोबोटिक सर्जरी, ई-हेल्थ, AR/VR और हाई-एंड वीडियोगेम्स को बढ़ावा देगा.
क्या है 6 GHz बैंड- यह बैंड Wi-Fi 6E और Wi-Fi 7 जैसी नई टेक्नोलॉजी के लिए जरूरी है.इससे इनडोर हाई-स्पीड इंटरनेट बिना रुकावट और देरी के संभव हो सकेगा. स्पेक्ट्रम की यह फ्रीक्वेंसी भीड़भाड़ कम करने और इंटरनेट की क्ववालिटी और बेहतर करने में मदद करती है.
कहां होगा सबसे ज्यादा इस्तेमाल- AI और रोबोटिक्स आधारित चीजों में हो सकता है. डिजिटल हेल्थकेयर (ई-हेल्थ),Augmented Realityऔर Virtual Reality ,गेमिंग और स्मार्ट होम डिवाइसेज़ में हो सकता है.
किसे होगा फायदा- टेलीकॉम ऑपरेटरों को बड़ा फायदा मिलेगा. वे हाई स्पीड Wi-Fi सेवाएं दे सकेंगे. नेटवर्क उपकरण बनाने वाली कंपनियों को- जैसे राउटर, IoT डिवाइसेज बनाती है. डिजिटल स्टार्टअप्स को: जिनके लिए तेज और सस्ता इंटरनेट जरूरी है.
अब तक 100 से ज्यादा देश 6 GHz बैंड को डी-लाइसेंस कर चुके हैं.भारत भी अब उसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है
डी-लाइसेंस का मतलब- कोई भी कंपनी या व्यक्ति, सरकारी अनुमति और भुगतान के बिना इस बैंड का उपयोग कर सकता है. इसका उपयोग Wi-Fi हॉटस्पॉट्स, स्मार्ट डिवाइस, या IoT नेटवर्क में किया जा सकता है.
सरकार का यह कदम भारत में डिजिटल इनफ्रास्ट्रक्चर को सशक्त बनाने और भविष्य की टेक्नोलॉजी को अपनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. इससे तेज, सस्ती और स्थिर कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी, जो डिजिटल इंडिया के विज़न को और मजबूत करेगी.
