नई दिल्ली:- जिन लोगों ने अभी तक अपना इनकम टैक्स फाइल नहीं किया है, उनके लिए बड़ी खबर है. जानकारी के मुताबिक केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने राहत देते हुए आईटीआर फाइल करने की समयसीमा को 31 जुलाई 2025 से बढ़ाकर 15 सितंबर 2025 कर दिया है. बता दें, ITR फॉर्म की अधिसूचना जारी में देरी होने के बाद विभाग ने यह फैसला लिया है.
जो जानकारी सामने आई है उसके मुताबिक विभाग ने इस साल आईटीआर फॉर्म में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं. इन बदलावों में फाइलिंग सिस्टम में आवश्यक समायोजन और टीडीएस क्रेडिट रिफ्लेक्शन शामिल हैं. जिसे अप्रैल के अंत और मई की शुरुआत में अधिसूचित किया गया था. इन बदलावों के चलते अधिसूचना जारी करने में हुई देरी की वजह से समयसीमा को बढ़ाया गया है. अधिकारियों की मानें तो अब टैक्स फाइल करना बेहद आसान हो जाएगा.
सीबीडीटी ने कहा कि करदाताओं के लिए एक सुचारू और सुविधाजनक फाइलिंग अनुभव की सुविधा के लिए, यह निर्णय लिया गया है कि आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तिथि, जो मूल रूप से 31 जुलाई थी, को बढ़ाकर 15 सितंबर, 2025 कर दिया गया है. यह विस्तार उन व्यक्तियों, एचयूएफ और संस्थाओं पर लागू होता है जिन्हें अपने खातों का ऑडिट करवाने की आवश्यकता नहीं है. वे अब 2024-25 (अप्रैल-मार्च) वित्त वर्ष में अर्जित आय के लिए अपना कर रिटर्न 15 सितंबर तक दाखिल कर सकते हैं.
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने एक बयान में कहा कि आईटीआर फॉर्म में बदलावों को शामिल करने और उपयोगिताओं को लागू करने के लिए आयकर प्रणाली तैयार करने के लिए समय सीमा में विस्तार आवश्यक था. इसके अलावा, 31 मई तक दाखिल किए जाने वाले टीडीएस विवरणों से उत्पन्न क्रेडिट जून की शुरुआत में दिखाई देने लगेंगे, जिससे इस तरह के विस्तार के अभाव में रिटर्न दाखिल करने की प्रभावी अवधि सीमित हो जाएगी.
ईवाई इंडिया के पार्टनर और नेशनल लीडर, पीपल एडवाइजरी सर्विसेज-टैक्स, सोनू अय्यर ने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 (एवाई 2025-26) के लिए अधिसूचित आईटीआर फॉर्म में वित्त अधिनियम 2024 द्वारा पेश किए गए संशोधनों को शामिल किया गया है और इसमें दावा की जा रही कटौती से संबंधित रिपोर्टिंग आवश्यकताओं को बढ़ाया गया है. टीडीएस सेक्शन कोड की रिपोर्ट करने की आवश्यकता, 23 जुलाई, 2024 से पहले और बाद के लिए पूंजीगत लाभ का विभाजन प्रदान करना है. वित्त अधिनियम 2024 ने 23 जुलाई, 2024 को या उसके बाद विशिष्ट लेनदेन पर पूंजीगत लाभ कराधान को युक्तिसंगत बना दिया है.
सरकार ने दी थी राहत
बता दें, केंद्र की मोदी सरकार ने इस बार 12 लाख तक की सैलरी को आयकर मुक्त कर दी थी. वहीं, 1 अप्रैल 2025 से नए टैक्स रिजीम भी लागू हो गए हैं. इसके अलावा न्यू टैक्स रिजीम के साथ 75 हजार रुपये स्टैंडर्ड डिडक्शन की भी लाभ मिलेगा. इसका मतलब साफ है कि जिसकी सैलरी 12.75 लाख रुपये हैं, उसे भी टैक्स नहीं भरना होगा. ध्यान रहे कि 15 सितंबर 2025 तक हर हाल में टैक्स फाइल कर दें. अगर उसके बाद करते हैं तो पेनाल्टी देनी होगी.