रायपुर:- विकसित कृषि संकल्प अभियान कृषि क्षेत्र में प्रधानमंत्री के “लैब टू लैण्ड” मंत्र को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा 29 मई 2025 को यह अभियान शुरू किया जा रहा है. 12 जून 2025 तक अभियान चलेगा.
33 जिलों में चलेगा विकसित कृषि संकल्प अभियान: छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में अभियान चलाया जायगा. कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने न्यू सर्किट हाउस रायपुर में एक पत्रकार वार्ता के दौरान इसकी जानकारी दी. मंत्री राम विचार नेताम ने कहा कि कृषि कार्यों के लिए प्रत्येक राज्य की अपनी खरीफ पूर्व तैयारियों होती है. इनसे बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए राज्य की तैयारियों और इस अभियान को एकीकृत किया जा रहा है. रामविचार नेताम ने कहा कि फसलों में कम पानी का इस्तेमाल, जलस्तर कैसे बढ़ाया जाए, खेती में कम उर्वरक और खाद का इस्तेमाल करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करेंगे.
किसानों को दी जाएगी जानकारी: अभियान के दौरान ड्रोन से उर्वरक छिड़काव का प्रदर्शन होगा. मृदा स्वास्थ्य कार्ड में बताई मात्रा के मुताबिक संतुलित उर्वरक के उपयोग के लिए किसानों को जागरूक किया जाएगा. किसानों को जागरूक करने के लिए सूचना प्रसारण एवं प्रौद्योगिकी की मदद ली जाएगी. क्रेडिट कार्ड के लिए भी किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा.
फसल चक्र परिवर्तन के लिए किया जाएगा प्रेरित: फसल चक्र परिवर्तन के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा. सिंचाई संसाधनों जैसे ड्रिप स्प्रिंकलर, जल संरक्षण संवर्धन की तकनीकी चीजों की जानकारी दी जाएगी. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत केवाईसी, आधार सींडिंग, सेल्फ रजिस्ट्रेशन, फिजिकल वेरिफिकेशन किया जाएगा. इस अभियान का कियान्वयन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संस्थानों, कृषि विज्ञान केन्द्रों और राज्य शासन के कृषि विभाग के मैदानी अधिकारियों द्वारा किया जाएगा.
विकसित कृषि संकल्प अभियान कैसे होगा संचालित?: यह अभियान छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में चलाया जावेगा, जिसमें कुल 100 दलों द्वारा 2,600 स्थानों पर कार्यक्रम होंगे. प्रत्येक जिले में 3 दलों का गठन होगा. प्रत्येक दल 1 दिन में 2 स्थानों पर कार्यकम आयोजित करेगा. प्रत्येक दल में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संस्थानों और कृषि विज्ञान केन्द्रों के 3-4 वैज्ञानिक, राज्य शासन के कृषि, उद्यानिकी, मछलीपालन एवं पशुपालन विभाग के अधिकारी शामिल रहेंगे. सभी जनजातीय, आकांक्षी और भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी.