नई दिल्ली;– ग्रहों का हमारे जीवन में बहुत गहरा महत्व है। दरअसल ये हमारी कुंडली में विराजित ऐसी चीज है। जिनकी दिशा और दशा में समय-समय पर परिवर्तन आता है। यह परिवर्तन हमारे पूरे जीवन को प्रभावित करने का काम करता है। कई बार ग्रहों की चाल शुभ साबित होती है और कई बार अशुभ परिणाम देने लगती है।
जिस तरह से ग्रह महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस तरह से रत्न शास्त्र में कुछ रत्नों का उल्लेख दिया गया है, जिनका जीवन स्तर को सुधारने में विशेष योगदान होता है। दरअसल, यह रत्न ग्रहों की स्थिति को मजबूत बनाते हैं, जिससे हमें शुभ परिणाम मिलते हैं। चलिए आज हम आपको सूर्य के रत्न के बारे में बताते हैं।
सूर्य का रत्न माणिक्य (Ruby)
माणिक्य सूर्य का रत्न है जो किसी भी व्यक्ति के भाग्य को सूर्य की तरह चमका सकता है। यह लाल रंग का बहुत ही चमत्कारी रत्न है जिसमें हल्का पीलापन भी नजर आता है। अगर इसे सूर्य के प्रकाश में रखा जाए तो चारों तरफ लाल रंग की किरणें बिखर जाती है। चलिए जान लेते हैं कि इस कब धारण करना चाहिए।
कब करें धारण
माणिक्य जब कुंडली में लग्नेश सूर्य होता है तब धारण करना शुभ माना गया है।
इसके अलावा अगर कुंडली में सूर्य तृतीय भाव में रहता है तब इसे धारण किया जा सकता है।
जब कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य बैठा हो तब ज्योतिष की सलाह के बाद इस धारण कर सकते हैं। दरअसल ये बीमारियों को दूर करने का काम करता है।
जब किसी व्यक्ति की कुंडली के चौथे भाव में सूर्य विराजित होता है तब उसकी आय में रुकावट आने लगती है। ऐसे समय में माणिक्य धारण करना शुभ माना गया है।
कुंडली में अष्टम स्थान पर सूर्य बैठा हो तब इसे धारण नहीं करना चाहिए क्योंकि ये कष्ट दे सकता है।
वृषभ, तुला, मकर और कुंभ राशि के लोग ज्योतिष की सलाह से माणिक्य धारण कर सकते हैं।
जब सूर्य तृतीय स्थान पर बैठा होता है तब इसे धारण नहीं करना चाहिए।
कैसे करें धारण
माणिक्य धारण करने के लिए रविवार का दिन सबसे उत्तम माना जाता है।
रविवार के दिन कृतिका, पुष्य, उत्तराभाद्रपद जैसे नक्षत्र में 5 कैरेट का माणिक्य धारण करें।
माणिक्य आपको सोनिया तांबे की अंगूठी में बनवाकर कनिष्ठा उंगली में सूर्योदय से लेकर सुबह 9 बजे तक पहनना होगा।
जब आप इसे धारण करें तो सूर्य मंत्र का जाप जरुर करें। यह जब कम से कम 108 बार होना चाहिए।
