धमतरी :- भगवान जगन्नाथ पूरे दुनिया में पूजे जाते हैं.हमारे देश में जगन्नाथ पुरी के अलावा हर राज्य में जगन्नाथ मंदिर देखने को मिल जाएंगे. इन मंदिरों में वैसा ही पूजन किया जाता है,जैसा कि पुरी में होता है. जगन्नाथ की सेवा सबसे कठिन मानी जाती है.क्योंकि उन्हें जागृत देव माना गया है.जो आज भी अपने भक्तों को दर्शन देते हैं.हर साल भगवान जगन्नाथ पुरी में अपने भव्य मंदिर से निकलकर रथ में बैठते हैं और पूरे नगर का भ्रमण करके भक्तों को दर्शन लाभ देते हैं.ऐसी परंपरा देश के कई मंदिरों में निभाई जाती है.इससे पहले भी कई तरह के नियम और पूजन भगवान जगन्नाथ के लिए होते हैं.जिसमें एक रस्म सहस्त्र स्नान की भी होती है.इस स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ बीमार हो जाते हैं और फिर उनके स्वस्थ्य होने तक मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. इस दौरान भगवान को स्वस्थ्य करने के लिए औषधीय काढ़ा पिलाया जाता है. इसी परंपरा का निर्वहन धमतरी के जगन्नाथ मंदिर में किया गया.
काढ़ा से जगन्नाथ जी का उपचार :
भगवान जगन्नाथजी के बीमार होने के बाद उन्हें औषधीय युक्त काढ़ा भोग लगाकर स्वस्थ किया जा रहा है. पुराने जमाने में जब चिकित्सकीय सुविधाएं नहीं थी तब प्राकृतिक जड़ी बूटियों से ही उपचार किया जाता था. समय के साथ चिकित्सकीय युग में परिवर्तन आया और अंग्रेजी दवाओं ने अपनी जगह बनाई. लेकिन यह बात सत्य है कि हमारा आयुर्वेद आज भी एलोपेथी से श्रेष्ठ ही साबित हुआ है. आयुर्वेदिक औषधियों में जो गुण होते हैं वह किसी और में नहीं होते. यही वजह है कि आज भी लोग आयुर्वेदिक औषधियों पर अधिक विश्वास करते हैं. धमतरी में साल में एक बार जगदीश मंदिर में औषधीय युक्त काढ़ा बांटा जाता है जिसे ग्रहण करने दूर दराज से लोग पहुंचते हैं.
26 को दर्शन देंगे भगवान :
मंदिर के पुजारी पंडित बालकृष्ण शर्मा ने बताया कि महाप्रभु जगन्नाथ, भैय्या बलभद्र और बहन सुभद्रा को औषधि काढ़ा का भोग लगाया जा रहा है. 22 जून से 25 जून तक भक्तों को वितरण किया जाएगा. 26 जून को नेत्रोत्सव का पर्व मनाया जाएगा. वैदिक रीति-रिवाज के साथ प्रतिमाओं की पुन: प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी. आरती पश्चात मंदिर का पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोला जाएगा. 27 जून को पूजा-अर्चना और आरती के बाद महाप्रभु जगन्नाथ को रथ में विराजमान कराया जाएगा. साथ ही श्री जगदीश मंदिर से रथयात्रा निकाली जाएगी. यह रथयात्रा 3 किमी का सफर तय कर गौशाला जनकपुर पहुंचेगी. यहां भगवान 10 दिन विश्राम कर श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे.
काढ़ा का सेवन करते हैं भक्त :
भगवान श्री जगन्नाथ रथ यात्रा के पहले हर साल ज्यादा स्नान करने की वजह से बीमार पड़ते हैं और फिर उनका इलाज आयुर्वेदिक काढ़े से किया जाता है. यह काढ़ा इतना प्रभावशाली होता है कि इसका प्रसाद लेने भक्त सुबह से ही मंदिर में लाइन लगाए रहते हैं. ऐसी मान्यता है कि एक बार इस काढ़े का सेवन कर लेने से साल भर कोई बीमार नहीं पड़ता. काढ़ा बेहतरीन इम्यूनिटी बूस्टर का कार्य करता है. हालांकि इस काढ़े को बनाने की विधि यहां के पंडित ही जानते है जिसे गोपनीय रखा गया है.
भगवान के बाद भक्तों को मिलता है काढ़ा :
धमतरी में भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा, भाई बलभद्र के बीमार होने के बाद औषधि के रूप में इस्तेमाल होने वाले काढ़े का वितरण जगदीश मंदिर में भक्तों एवं श्रद्धालुओं को किया जा रहा है. लंबी लाइन के बावजूद इसे प्राप्त करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लग रहा है. यह काढ़ा वास्तव में बरसात के समय होने वाली मौसमी सहित अन्य बीमारियों में शरीर को लाभ पहुंचाता है. ऐसी मान्यता है कि रथयात्रा के पूर्व महा स्नान के साथ ही प्रभु अस्वस्थ हो जाते हैं. जिन्हें विराजित स्थल से गर्भ गृह में विराजमान कर औषधि जड़ी बूटी से निर्मित काढ़ा पिलाया जाता है.इस दौरान विशेष पूजा अर्चना की जाती हैं. भगवान के इलाज के लिए पिलाए गए काढ़ा को भक्तों को मंदिर परिसर में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है. ऐसी मान्यता है कि प्रभु को दिया जाने वाला काढ़ा जिस भी भक्त द्वारा ग्रहण किया जाता है वह साल भर निरोगी रहता है.