नई दिल्ली: – देश के 69 हवाई अड्डों की सुरक्षा को अब और स्मार्ट व तेज बनाने के लिए CISF ने एक बड़ा कदम उठाया है। एयरपोर्ट सेक्टर मुख्यालय में 27 जून को आयोजित एक कार्यशाला में डिजिटल मानक संचालन प्रक्रियाएं (Digital SOPs) लागू करने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। इस पहल से हवाई अड्डों की सुरक्षा व्यवस्था न केवल तकनीकी रूप से मजबूत होगी, बल्कि यात्रियों के अनुभव को भी अधिक सहज और सुरक्षित बनाया जा सकेगा।
सीआईएसएफ की मेजबानी में हुई इस कार्यशाला में नागरिक उड्डयन मंत्रालय, डीजीसीए, बीसीएएस, दिल्ली पुलिस, एयर इंडिया एक्सप्रेस, इंडिगो जैसी एजेंसियों और एयरलाइनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य सुरक्षा चिंताओं का त्वरित, समन्वित और बुद्धिमान प्रतिक्रिया से समाधान करना था। सीआईएसएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल SOPs के जरिए चेहरा पहचानने वाली तकनीक, बायोमेट्रिक पास, एएनपीआर कैमरे और फास्ट टैग जैसी प्रणाली को एकीकृत किया जाएगा।
वीआईपी सुरक्षा से लेकर एआई तक हर मोर्चे पर तैयारी
कार्यशाला में उन्नत वीआईपी सुरक्षा प्रोटोकॉल, एंटी-ड्रोन रणनीतियां और अंदरूनी खतरे की पहचान जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। सीआईएसएफ के स्पेशल डीजी प्रवीर रंजन ने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए हवाई अड्डों की सुरक्षा को नए सिरे से डिज़ाइन करने की जरूरत है। जोस मोहन, IG APS-II, CISF ने कहा कि तकनीकी एकीकरण और सहयोग से ही सुरक्षा का मानकीकरण संभव है। वहीं विजय प्रकाश, IG APS-I ने जमीन पर कान रखने और खुफिया सूचना साझा करने की रणनीति को दोहराया।
यात्री अनुभव और प्रशिक्षण में भी बड़ा सुधार
कार्यशाला में यह भी तय किया गया कि एयरपोर्ट स्टाफ और सुरक्षा बलों के बीच एकीकृत प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा ताकि हर टचपॉइंट पर पेशेवर और मानकीकृत अनुभव सुनिश्चित हो सके। छोटे शहरों में अधिक ट्रेनिंग संस्थान खोले जाने की योजना बनाई गई है ताकि बढ़ती हवाई यात्रा की मांग को पूरा किया जा सके। यात्री शिकायत निवारण प्रणाली को लेकर एयरसेवा जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
