श्रीनगर:- केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जम्मू कश्मीर के सेब उद्योग को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. इसके तहत उन्होंने शुक्रवार को घाटी में 150 करोड़ रुपये की लागत से ग्रीन प्लांट सेंटर स्थापित करने की घोषणा की. इसका उद्देश्य सेब की खेती की क्वालिटी में सुधार लाना और भारत को फलों के प्रोडक्शन में आत्मनिर्भर बनाना है.
श्रीनगर में शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए चौहान ने कश्मीर को ‘सेब की प्रचुरता से समृद्ध भूमि’ बताया, लेकिन प्रोडक्टिविटी और निर्यात क्षमता बढ़ाने के लिए बेहतर रोपण सामग्री की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया.
मंत्री ने कहा, जम्मू कश्मीर पहले से ही सेब उत्पादन में समृद्ध है, लेकिन अब हमें हाई क्वालिटी वाले पौधों की आवश्यकता है. इसलिए केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र में 150 करोड़ रुपये की लागत से हरित पौधा केंद्र की स्थापना को मंजूरी दी है.
खेती में छह गुना बढ़ोतरी
चौहान ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हाई कल्टिवेशन वाले सेब की खेती में हाल के वर्षों में छह गुना बढ़ोतरी देखी गई है. ऐसे में केंद्रित इनोवेशवन और समर्थन के साथ कश्मीर के सेब जल्द ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर हावी हो सकते हैं. उन्होंने जोर देकर कहा, “हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि भारत को फिर कभी सेब आयात न करना पड़े. इसके बजाय, हम अपने सेब दुनिया को निर्यात करेंगे.
SKUAST-K की शैक्षणिक उत्कृष्टता की प्रशंसा करते हुए चौहान ने कहा कि वह विश्वविद्यालय की प्रगति और इसके विविध छात्र निकाय से प्रभावित हैं. उन्होंने कहा, यहां 20 राज्यों के छात्र नामांकित हैं. SKUAST-K वर्तमान में भारत के कृषि विश्वविद्यालयों में पांचवें स्थान पर है और मुझे विश्वास है कि यह जल्द ही टॉप स्थान पर पहुंच जाएगा.
आपकी शिक्षा यहीं समाप्त नहीं होती
उन्होंने स्नातक छात्रों से आग्रह किया कि वे दीक्षांत समारोह को समापन के रूप में न देखें, बल्कि इसे एक नई शुरुआत के रूप में देखें. चौहान ने कहा, आपकी शिक्षा यहीं समाप्त नहीं होती -यह अभी शुरू होती है. आपने कक्षाओं और प्रयोगशालाओं में जो सीखा है, उसे अब खेतों में लागू किया जाना चाहिए. कृषि भारत की अर्थव्यवस्था की नींव है. देश की लगभग आधी आबादी भोजन और आजीविका के लिए इस पर निर्भर है.
संस्थान के व्यापक दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि SKUAST-K में एग्रीकल्चर एक्सीलेंस के विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त केंद्र में बदलने की क्षमता है. उन्होंने कहा, “यह विश्वविद्यालय न केवल राष्ट्र की सेवा कर सकता है – बल्कि यह विश्व की सेवा भी कर सकता है.