नई दिल्ली:– अगर आप से पूछा जाए कि भगवान को प्रसन्न करने का सबसे सरल रास्ता क्या है तो आप मंदिर जाना, सत्संग सुनना या व्रत रखना इन तीनों में से किसी एक का नाम लेंगे।
ये तीनों ही भक्ति मार्ग के पहले द्वार हैं। लेकिन सबसे सरल मार्ग ये तीनों नहीं हैं। ये हम नहीं बल्कि प्रेमानंद महाराज का कहना है।
प्रेमानंद महाराज से एक भक्त यह सवाल करता है कि जिसपर वह कहते हैं कि भगवान को प्रसन्न करने का सबसे सरल मार्ग है शरणागत
प्रेमानं महाराज एकादशी स्कंद भागवत के एक श्लोक पढ़ते हुए कहते हैं कि, भगवान ने खुद ही कहा है कि मैं बड़े-बड़े व्रत से वस में होने वाला नहीं हूं, मैं बड़ी-बड़ी यज्ञों से वस में होने वला नहीं, मैं नियम संयम से वस में होने वाला नहीं
अगर मैं वस में होता हूं तो साधु संग से होता हूं। प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि साधु संग का मतलब होता है कि भगवान के शरण में होना।
प्रेमानंद महाराज ने बताया कि भगवान को प्रसन्न करने का श्रेष्ठ उपाय यही है कि ‘हे नाथ मैं जैसा भी हूं आपका हूं’। क्योंकि, इसके अलावा हमारे पास कुछ नहीं है।
प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि, भगवान कहते हैं कि करोड़ों विप्रो, ब्राह्मणों, ऋषियों के मारने का पाप लगा हो तो भी भगवान के शरण में आ जाने से वो अपना लेते हैं।
प्रेमानंद महाराज के अनुसार आप अपने आप को पूरी तरह से भगवान को समर्पित कर दें और कहें कि ‘मैं जो भी हूं, जैसा भी हूं आपका ही हूं’। अगर सच्चे मन से आप भगवान की शरण में जाना चाहते हैं तो वो जरूर आपको अपना लेंगे
