नई दिल्ली:– जगदीप धनखड़ ने सोमवार को उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया। संविधान के आर्टिकल 67(A) के तहत उन्होंने संसद के मानसून सत्र शुरु हो ने वाले दिन ही ये कदम उठाया। भारत के 75 साल के इतिहास में ऐसा दूसरी बार हुआ है जब इस नियम का इस्तेमाल किया गया है। यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जो उपराष्ट्रपति के पद को भी अंडरलाइन करती है औऱ इससे पहले साल 1969 में वीवी गिरी ने इस नियम का उपयोग किया था।
क्या है आर्टिकल 67(A)?
भारती के संविधान का आर्टिकल 67 उपराष्ट्रपति के कार्यकाल तथा पद से हटने की प्रक्रिया को दिखाता है। इसके खंड (A) के जरिए राष्ट्रपति को लिखित रूप में उपराष्ट्रपति इस्तीफा सौंपकर अपनी इच्छा से पद छोड़ सकता है। वहीं खंड (B) में प्रावधान है कि उपराष्ट्रपति को राज्यसभा में बहुमत तथा लोकसभा की सहमति से प्रस्ताव पारित करके हटाया जा सकता है, लेकिन 14 दिन का नोटिस दिया जाए। धनखड़ ने अनुच्छेद 67(A) के तहत भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर तत्काल प्रभाव से पद छोड़ दिया, जिसमें उन्होंने स्वास्थ्य और चिकित्सकीय सलाह की बात कही।
वीवी गिरी ने भी छोड़ा था पद?
भारत के इतिहास में ये दूसरा मौका है जब संविधान के आर्टिकल 67(A) के तहत उपराष्ट्रपति ने अपना पद छोड़ा हो। इससे पहले 20 जुलाई 1969 को वीवी गिरी ने राष्ट्रपति जाकिर हुसैन की मौत के बाद राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया था। गिरी बाद में भारत के राष्ट्रपति बने। वीवी गिरी का इस्तीफा राष्ट्रपति बनने की महत्वाकांक्षा के चलते था, जगदीप धनखड़ का मामला इससे अलग है। इनका फैसला स्वास्थ्य आधारित है।
इस्तीफे का प्रभाव
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन ही जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा दे दिया, जब सरकार और विपक्ष के बीच तनाव चरम पर था। पिछले सेशन के दौरान उनके कट्टर रुख तथा विपक्ष के साथ मतभेद की वजह से वो चर्चा में थे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ उनका विवाद खूब चर्चा में था। विपक्ष द्वारा 2024 में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाने की कोशिश की गई थी, जो असफल रहा। अब नया उपराष्ट्रपति चुने जाने तक राज्यसभा की अध्यक्षता डिप्टी चेयरमैन करेंगे।
