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    डोनाल्ड ट्रंप इस गंभीर नर्व डिजीज से हैं पीड़ित, जानें क्या है CVI, जिसमें नसों में होती है सूजन

    By Tv 36 HindustanJuly 23, 2025No Comments5 Mins Read
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    नई दिल्ली :- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को पिछले कुछ सप्ताह से पैर के निचले हिस्से में सूजन महसूस हो रही थी. उन्होंने इस दर्द के पीछे की वजह को जानने के लिए कुछ टेस्ट करवाए तो पता चला कि उन्हें क्रॉनिक वेनस इन्सफिशिएंसी है.

    राष्ट्रपति ट्रंप के चिकित्सक, डॉ. सीन बारबेला ने एक सार्वजनिक पत्र में पुष्टि की कि राष्ट्रपति ट्रंप में डीप वेन थ्रोम्बोसिस या धमनी रोग का कोई लक्षण नहीं पाया गया. ट्रंप के सभी लैब परिणाम सामान्य सीमा के भीतर थे. पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने एक इकोकार्डियोग्राम भी करवाया, जिससे पुष्टि हुई कि उनके हार्ट हेल्थ टेस्ट का रिजल्ट नॉर्मल heart structure और कार्य दर्शाते हैं. लेकिन क्रोनिक वेनस इनसफीशिएंसी क्या है और यह कितना जोखिम भरा है? आइए जानें…

    क्रॉनिक वेनस इनसफीशिएंसी क्या है

    क्लीवलैंड क्लिनिक बताता है कि CVI एक प्रकार का वेन डिसआर्डर है. जब पैरों की नसें डैमेज हो जाती हैं और ठीक से काम करना बंद कर देती हैं, तो इस समस्या को क्रॉनिक वेनस इनसफीशिएंसी कहा जाता है. पैरों की नसों में वाल्व होते हैं जो खून को हृदय की ओर ऊपर की ओर ले जाने में मदद करते हैं. हालांकि, इस मेडिकल कंडिशन में, ये वाल्व क्षतिग्रस्त हो जाते हैं. डैमेज होने पर, ये ठीक से बंद नहीं हो पाते और ब्लड पीछे की ओर बहने लगता है. जिससे पैरों में खून जमा होने लगता है. इससे नसों में दबाव बढ़ जाता है और सूजन या घाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

    इसके लक्षणों में दर्द, पैरों में भारीपन या झुनझुनी का एहसास और वैरिकाज नसों का दिखना शामिल हो सकता है. क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, आमतौर पर यह समस्या 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में होती है. दुनिया में 10 से 35 फीसदी वयस्कों को यह समस्या है. भारत में भी हर तीन में से एक वयस्क को क्रॉनिक वेनस इनसफीशिएंसी है, जबकि 4-5 फीसदी लोगों में इसके लक्षण गंभीर रूप में दिखाई देते हैं. इनमें यह स्थिति अल्सर का रूप ले चुकी होती है.

    क्रॉनिक वेनस इनसफीशिएंसी शरीर को कैसे प्रभावित करती है

    सीवीआई में पैरों में खून प्रवाह धीमा हो जाता है और यह दिल तक ठीक से वापस नहीं पहुंच पाता है. अगर इसका इलाज न किया जाए, तो पैरों की नसों में दबाव इतना बढ़ जाता है कि सबसे छोटी रक्त वाहिकाएं, यानी सेल्स, फटने लगती हैं. इससे त्वचा पर उस हिस्से का रंग लाल-भूरा होने लगता है और थोड़ी सी चोट या खरोंच लगने पर भी वह हिस्सा फट सकता है

    केशिकाओं के फटने से कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं –

    उस हिस्से में सूजन आ सकती है.

    टिश्यू डैमेज, यानी त्वचा का अंदरूनी हिस्सा डैमेज हो सकता है
    वीनस स्टैसिस अल्सर, यानी त्वचा पर खुले घाव हो सकते हैं.

    ये अल्सर जल्दी ठीक नहीं होते और अगर ध्यान न दिया जाए, तो इनमें इंफेक्शन हो सकता है.

    यह इंफेक्शन आसपास की त्वचा में भी फैल सकता है, जिसे सेल्युलाइटिस कहते हैं.

    अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो यह स्थिति खतरनाक हो सकती है.

    सीवीआई कितना गंभीर है

    यह स्थिति आमतौर पर गंभीर नहीं होती है, लेकिन समय के साथ बिगड़ सकती है. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की वैस्कुलर हेल्थ एडवाइजरी कमेटी और पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज पर वैज्ञानिक परिषद के अध्यक्ष, डॉ. जोशुआ ए. बेकमैन ने कहा कि क्रोनिक वेनस इनसफीशिएंसी आपके जीवन की गुणवत्ता को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकती है, लेकिन जल्द पहचान और उपचार से बहुत फर्क पड़ सकता है. हालांकि यह स्थिति आमतौर पर गंभीर नहीं होती, लेकिन यह अधिक खतरनाक जटिलताओं से जुड़ी हो सकती है, जैसे डीप वेन थ्रोम्बोसिस (गहरी नस में ब्लड क्लॉटिंग ) या पल्मोनरी एम्बोलिज्म (फेफड़ों में खून के प्रवाह को ब्लॉक करने वाला थक्का).

    CVI के लक्षण क्या है

    सीवीआई यानी पैरों की नसों में कमजोरी के कारण खून वापस दिल तक ठीक से नहीं पहुंच पाता, जिससे शरीर में कुछ खास लक्षण दिखाई देने लगते हैं, इसमें शामिल है…

    पैरों में भारीपन या थकान महसूस होना

    नीली नसें उभरी हुई दिखना

    त्वचा में जलन या झुनझुनी महसूस होना

    सुई चुभने जैसा एहसास
    रात में पैरों में ऐंठन या मरोड़

    त्वचा का लाल-भूरा रंग
    पिंडलियों और टखनों में सूजन

    पैरों की त्वचा में खुजली
    लंबे समय तक खड़े रहने से सूजन बढ़ जाना

    त्वचा चमड़े की तरह सख्त हो जाना

    त्वचा पर छाल जैसी परत बन जाना

    टखने के पास की त्वचा पर घाव

    सीवीआई का इलाज क्या है

    डॉक्टर आमतौर पर कम्प्रेशन थेरेपी से इलाज शुरू करते हैं, जो पैरों की सूजन और बेचैनी को कम करने में मदद करती है. कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स की अक्सर सलाह दी जाती है और इन्हें लंबे समय तक पहना जा सकता है, क्योंकि ये हृदय में रक्त प्रवाह बढ़ाकर नसों को सुचारू रूप से काम करने में मदद करते हैं. इसके अलावा, डॉक्टर रक्त परिसंचरण में सुधार के लिए वजन कम करने या प्रतिरोधक व्यायाम की सलाह दे सकते हैं.

    यदि पैरों में दर्द, त्वचा पर घाव या मोटी, सख्त त्वचा जैसे लक्षण बने रहते हैं, तो अधिक आक्रामक उपचार आवश्यक हो सकते हैं. इनमें थर्मल थेरेपी जैसे लेजर उपचार, जो क्षतिग्रस्त नसों को बंद कर देता है, और स्क्लेरोथेरेपी, जिसमें प्रभावित नसों को बंद करने के लिए एक रसायन इंजेक्ट किया जाता है, शामिल हैं. इलाज के बाद, शरीर स्वाभाविक रूप से हेल्दी नसों के माध्यम से ब्लड फ्लो को रीडायरेक्ट करता है.

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