छत्तीसगढ़:- ईसाई धर्मांतरण के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने गंभीर चिंता जताई। जशपुर से आने वाले विष्णुदेव साय ने बताया कि उस इलाक़े में एशिया का दूसरा सबसे बड़ा चर्च है जहाँ स्वास्थ्य और शिक्षा पर मिशनरियों के एकाधिकार की स्थिति बनी हुई थी। उन्होंने स्वतंत्र भारत के शुरुआती वर्षों का उल्लेख किया जब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल को यहाँ काले झंडे दिखाए गए थे। उन्होंने इलाक़े की स्थिति ठीक करने के लिए रमाकांत देशपांडे को DO बनाकर भेजा।
कई वर्षों तक काम करने के बाद रमाकांत देशपांडे ने सरकारी सेवा छोड़कर एक पेड़ के नीचे छह बच्चों के साथ स्कूल शुरू किया, जो वनवासी कल्याण आश्रम की नींव बनी। वो बालासाहब देशपांडे के नाम से जाने गए। सीएम साय ने बताया कि कैसे जशपुर राजघराने के दिलीप सिंह जूदेव ने घर वापसी अभियान चलाया और अब उनके पुत्र प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, अमेरिका से लौटकर, इस अभियान को चला रहे हैं। उन्होंने राजपरिवार को जनजातीय समाज के लिए कार्य करने और धर्मांतरण विरोधी अभियान चलाने का श्रेय दिया।
मुख्यमंत्री ने ईसाई मिशनरियों की सच्चाई बताते हुए कहा कि सेवा के नाम पर सौदा हो रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे पहले जब ग़रीब को कोदो और महुआ खाकर जीने को मज़बूर थे, तब अमेरिका से उनके लिए लाल गेहूँ, सेकंड हैंड कपड़े, तेल और पाउडर लाए जाते थे; आज भी वही किया जा रहा है। उन्होंने नारायणपुर की तीन आदिवासी लड़कियों के धर्मांतरण और मानव तस्करी के एक मामले में 2 ननों की गिरफ़्तारी के मुद्दे पर भी सवालों के जवाब दिए। उन्होंने जानकारी दी कि सुखमन मंडावी नामक एक युवक इन लड़कियों को लेकर स्टेशन पहुँचा था, जहां दो नन भी थीं। लड़कियाँ रो रही थीं, सूचना पर पुलिस पहुँची और मामला दर्ज हुआ। फ़िलहाल कोर्ट ने उनकी जमानत खारिज कर दी है।
