नयी दिल्ली: दिल्ली के महिला एवं बाल विकास मंत्री राजेन्द्र पाल गौतम ने कहा कि बाल-आशियाना बच्चों की समग्र देखभाल और विकास के लिए एक आदर्श घर है जहां बच्चों को देखभाल और सुरक्षा की आवश्यकता होती है, उनको ध्यान में रखते हुए घर का पुनर्विकास और पुन: डिज़ाइन किया जाता है।
श्री गौतम ने शनिवार को यहाँ बाल दिवस की पूर्व संध्या पर बाल आशियाना के उद्घाटन अवसर पर कहा, “भारत तभी विकसित देश बन सकता है, जब गरीबों के पास अमीर लोगों के समान सुविधाएं और अवसर हों। एक आम धारणा है कि केवल वे बच्चे जिनके माता-पिता अमीर हैं, उनको ही बेहतरीन शिक्षा मिल सकती है लेकिन दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार ने इस दृष्टिकोण को बदल दिया है। अब हमारे दिल्ली सरकार के स्कूलों में एक गरीब परिवार का बच्चा भी बेहतरीन शिक्षा प्राप्त कर रहा है।”
उन्होंने कहा कि यह मॉड्यूलर होम बच्चों के लिए एक मनोरंजन केंद्र एवं खेल के मैदान से सुसज्जित है। इतना ही नहीं, इस घर की खास बात यह है कि इसमें युवा वयस्कों के लिए एक कौशल प्रशिक्षण केंद्र है। एक बार जब बच्चा 18 वर्ष का हो जाता है, तो वह एक युवा वयस्क होता है। लेकिन उन्हें अभी भी देखभाल और सहयोग की जरूरत है। बड़ी दुनिया के लिए तैयार होने से पहले उन्हें अभी भी अपनी शिक्षा पूरी करने और नौकरी करने की आवश्यकता है। आफ्टर केयर कार्यक्रम के माध्यम से, हम उन युवा वयस्कों को कौशल विकास और प्रशिक्षण प्रदान करने का प्रयास कर रहे हैं जिनके माता-पिता या परिवार नहीं है। 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद भी बच्चा हमारी संस्था की देखरेख में रहेगा। हम उन्हें इस केंद्र में न केवल आवास प्रदान करेंगे बल्कि व्यवसाय प्रशिक्षण भी देंगे ताकि वे नौकरी पा सकें।
पीएचडी चैंबर फैमिली वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा संसाधन, प्रशिक्षण और कौशल विकास केंद्र इन युवा वयस्कों को मॉडल होम में व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करेगा।
इस आदर्श घर में 6-12 वर्ष की आयु के 100 बच्चों और 50 युवा वयस्कों (18 वर्ष से अधिक) के आवास की क्षमता है। लाजपत नगर के कस्तूरबा निकेतन में मॉडल होम का विकास वर्ष 2017-18 में शुरू हुआ। मॉडल होम लगभग 1607 वर्ग मीटर के क्षेत्र को कवर करते हुए 1.7 एकड़ भूमि में विकसित किया गया है। परिसर में सभी बुनियादी सुविधाओं के साथ ही दो मंजिलों पर अलग शयनगृह भी हैं। भूतल और पहली मंजिल में बहुउद्देश्यीय कमरे, छात्रावास के आकार के कमरे और शौचालय, पेंट्री से जुड़े अलग कमरे हैं। दोनों मंजिलों में विशाल आवास और मनोरंजक गतिविधियों के लिए एक हॉल है, जिसमें असेंबली और खेलने के लिए खुली जगह है।
पहले चरण में छह से 12 साल के बच्चों को इस न्यू मॉडल होम में स्थानांतरित किया जाएगा। इन बच्चों को अलीपुर कॉम्प्लेक्स में रखा गया था। बाद में, आफ्टर केयर में लड़कों को भी मॉडल होम में एक अलग सेक्शन में एक नया सुरक्षित और स्वस्थ आवास मिलेगा। बाल कल्याण समितियों के आदेश से इस मॉडल होम में और बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा।
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