गोकुल में देखों वृंदावन में देखो रे, मुरली वाले कृष्णचंद्र जी रुक्मिणी संग नाचै रे
विवाह की सजी आकर्षक झांकियों ने सबका मन-मोहा
शशिभूषण सोनी की खास रिपोर्टिंग
जांजगीर-चांपा, 11 जनवरी। कोसा , कांँसा और कंँचन की नगरी चांपा के रहसबेड़ा प्रांगण में श्रीमद्भागवत कथा के पांँचवें दिन व्यास पीठ पर विराजमान पंड़ित कृष्णा द्विवेदीजी महराज ने कथास्थल पर भगवान श्रीकृष्ण की बाल चरित्र की कथा, गोवर्धन पूजा करने की महत्ता,और इंद्र के प्रकोप से गोकुलवासियों की सुरक्षा के बाद रुक्मिणी कृष्ण के मंगल-विवाह की रसमयी कथा सुनाई । कथास्थल पर परिक्रमा करते हुए और कोविड -19 के नियमों का कठोरता से पालन करते हुए धूमधाम से बारात निकाली गई। स्वागत-सत्कार के बाद फूलों की जमकर वर्षा की गई। भजन-कीर्तन गाई गई और भक्त भजनों पर झुमते नज़र आए । आचार्य कृष्णा महराजजी ने रुक्मिणी विवाह और वर्तमान विवाह पद्धति के बारे में जानकारी दी । इस दौरान कथा श्रवण करने वाले में मुख्यत: भाजपा नेता अमर सुल्तानिया , प्रदीप कुमार नामदेव , हितेश यादव , मनीष तिवारी, गगन जयपुरिया , कार्तिकेश्वर स्वर्णकार, सोनू जायसवाल, जय थवाईत , हरदेव देवांगन, भीष्म राठौर, शशिभूषण सोनी , राजन फुल्लर,संजय पाठक, मधुसूदन सोनी, राजेश सोनी , राजन गुप्ता,
प्रदीप गुप्ता , गिरधारी गुप्ता , सुरेश गुप्ता, रीता गुप्ता , गुड्डी गुप्ता , भारती शर्मा, संतोषी सराफ , शशि गुप्ता , रत्ना गुप्ता, ममता गुप्ता , संदीप कुमार गुप्ता सहित अनेक लोग उपस्थित रहे ।
सुप्रसिद्ध कथाकार एवं मां समलेश्वरी मंदिर के आराधक कृष्णा महराजजी ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं विशेष कर मिट्टी खाने, नंँदबाबा और यशोदा मैय्या की वात्सल्य छवि का मनोहारी वर्णन सुनाकर श्रोतागण भावदोन्मुखीं होते रहे । विवाह संस्कार और मंगल-गीतों के बीच भक्तवृंद चांपावासियों के अतिरिक्त दुसरे राज्यों से कथा श्रवण करने के लिए विशेष आग्रह पर पधारे गुप्ता परिवार के लोग भी इसके साक्षी बनें । धार्मिक अनुष्ठान से सराबोर चांपा वासी भी रहसबेड़ा प्रांगण में लगातार रसपान कर रहे हैैं । कथास्थल पर भक्तिमय वातावरण बना हुआ हैं । रुक्मिणी कृष्ण के रुप में गुप्ता परिवार की बेटी श्रीमती डाली गुप्ता आकर्षण का केन्द्र वही नागपुर निवासी दमाद अमर गुप्ता कृष्ण के रुप में मोहित करते रहे । तेजोमय साज श्रृंगार अवर्णनीय थी। पूर्व नपाध्यक्ष प्रदीप नामदेवजी ने आरती उतार कर स्वागत करते हुए डाली को कहा ‘ आप सचमुच रुक्मिणी दिख रही हैं । रुक्मिणी का चरित्र निभा रही हैं । जोड़ियां स्वर्ग में बनती हैं और जमीन पर उसे विवाह संस्कार के द्वारा निभाई जाती हैं । ‘

दुबारा विवाह जैसे बंधन में बंधने पर बधाई देते हुए उन्होंने पारिवारिक संबंधों में हर दिन नयापन तराशनें और एक-दूसरे को आदर सम्मान देने की बात की । इस पर डाली शालीनता से मुस्कुराते हुए सहमति दी ।
कथा के दौरान ‘ गोकुल में देखो , वृंदावन में देखो रे , मुरलीधर कृष्णजी रुक्मिणी स़ंग नाचै रे ‘ कृष्ण भक्ति गीत पर नृत्य की प्रस्तुति ने सबको मोहित कर दिया । श्रद्धालु भी अपने-आपको रोक नहीं पाए और नाचने-गाने लगे । रुक्मिणी मंगल विवाह की कथा पर द्विवेदी महाराज ने कहा कि रुक्मिणी के विनम्र निवेदन एक ब्राम्हण के माध्यम से भिजवाने पर भगवान कृष्णजी ने उनका वरण किया । रूक्मिणी के भाई रूक्मीं के शिशुपाल से विवाह करने की प्रसंंग कथा का भी विस्तार पूर्वक महराजश्री ने सुनाया ।
भगवान् की सुंँदर कथा के साथ-साथ धूमधाम से विवाह भी वैदिक मंत्रोच्चारण कर कथा स्थल पर कराया गया । श्रीमद्भागवत कथा की पोथी आरती के बाद गुप्ता, गुलाबजामुन वाला नाल साहेब चौक, नागपुर के द्वारा एक-एक डिब्बा मिठाई पैकेट प्रसाद वितरण किया गया । कथा में मुख्य यजमान अनूप पुष्पा देवी गुप्ता परिवार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे । इस अवसर पर मंगलवार को होम, हवन-पूजन और सहस्त्रधारा के पश्चात समापन होगा।