नई दिल्ली, 12 जनवरी। लगातार बढ़ रही महंगाई के बीच उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने बताया कि देशभर के खुदरा बाजारों में खाद्य तेल की कीमतों में 20 रुपये प्रति किलोग्राम तक की बड़ी गिरावट आई है. सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमोडिटी की कीमतें अधिक होने के बावजूद उसके हस्तक्षेप से खाद्य तेलों के दाम घटे हैं. हालांकि, कीमतें एक साल पहले के मुकाबले अधिक हैं, लेकिन अक्टूबर 2021 से दाम लगातार घट रही हैं.

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने बताया कि 167 कलेक्शन सेंटर्स के ट्रेंड के अनुसार देशभर के प्रमुख खुदरा बाजारों में खाद्य तेलों की कीमतों में 5-20 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट आई है. आंकड़ों के मुताबिक, मूंगफली तेल का अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य 180 रुपये प्रति किलोग्राम, सरसों तेल का 184.59 रुपये प्रति किलोग्राम, सोया तेल का 148.85 रुपये प्रति किलोग्राम, सूरजमुखी तेल का 162.4 रुपये प्रति किलोग्राम और पाम तेल का 128.5 रुपये प्रति किलोग्राम है.
मंत्रालय के मुताबिक, अडाणी विल्मर और रुचि इंडस्ट्रीज समेत प्रमुख खाद्य तेल कंपनियों ने दाम 15-20 रुपये प्रति लीटर तक घटाए हैं. इनके अलावा, जेमिनी एडिबल्स एंड फैट्स इंडिया, हैदराबाद, मोदी नैचुरल्स, दिल्ली, गोकुल री-फॉयल एंड सॉल्वेंट, विजय सॉल्वेक्स, गोकुल एग्रो रिसोर्सेज और एन के प्रोटीन्स जैसी कंपनियों ने भी कीमतें घटाई हैं.
सरकार का कहना है कि इम्पोर्ट ड्यूटी में कटौती और जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट लगाने जैसे अन्य उपायों से सभी खाद्य तेलों की घरेलू कीमतों में कमी आई है. इससे उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है. खाद्य तेलों के आयात पर भारी निर्भरता के कारण घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए प्रयास करना महत्वपूर्ण है.
भारत खाद्य तेलों के सबसे बड़े आयातकों में शामिल है. देश में खपत का करीब 56-60 फीसदी हिस्सा इम्पोर्ट किया जाता है. मंत्रालय ने कहा कि वैश्विक उत्पादन में कमी और निर्यातक देशों के एक्सपोर्ट टैक्स बढ़ाने से खाद्य तेलों की अंतरराष्ट्रीय कीमतें दबाव में हैं. इसलिए खाद्य तेलों की घरेलू कीमतें आयातित तेलों की कीमतों से तय होती हैं.