
युग प्रवर्तक स्वामी विवेकानंद जी के अवतरण दिवस पर इंजीनियर सत्यनारायण सोनी का भी जन्मदिन हैं । हर राह आसन हो,हर राह पे खुशिया हो,हर दिन ख़ूबसूरत हो,ऐसा ही पूरा जीवन हो,यही हर दिन मेरी दुआ हो,ऐसा ही तुम्हारा हर जन्मदिन हो!
‼️ कर्तव्य पथ के राही सत्यनारायण ‼️
जांजगीर-चांपा । ‘ ‘उठो जागो और तब तक मत रुको , जब तक कि लक्ष्य प्राप्त हो न जाए – युगपुरुष एवं युवकों के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद जी द्वारा प्रवर्तित यह उद्घोषक,उत्प्रेरित वाक्य को अपने जीवन में आत्मसात करने वाले एनटीपीसी सीपत बिलासपुर में उप महाप्रबंधक सिविल इंजीनियर सत्यनारायण सोनी का भी जन्म उसीदिन तारीख का हैं ।

छोटे- मध्यम वर्गीय स्वर्णकार परिवार में जन्म लेकर विभिन्न स्थानों में अपनी सेवाएं देने के बाद अब एनटीपीसी , सीपत बिलासपुर में उप महाप्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं । सरस्वती शिशु मंदिर,चांपा में प्राथमिक शिक्षा, पूर्व माध्यमिक और हाईस्कूल की शिक्षा भी हिंदी माध्यम से इन्होंने इसी संस्थान से प्राप्त किया । गोविंदराम सेक्सरिया प्रौघोगिकी एवं विज्ञान संस्थान, इंदौर से इन्होंने से बीई सिविल इंजीनियरिंग की परीक्षा 86 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर उत्तीर्ण कर छत्तीसगढ़ अंचल को गौरवान्वित किया।
विश्वविद्यालय में बीई की परीक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने पर मध्यप्रदेश के तत्कालिक राज्यपाल डॉ भाई महावीर ने राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भोपाल के दीक्षांत समारोह में गोल्ड मेडल्स से सम्मानित किया। इनकी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्तर पर ही हुई। कुछ दिनों तक सीएमदुबे महाविद्यालय, बिलासपुर में बीकाम में दाखिला लिया लेकिन रुझान इंजीनियरिंग कॉलेज में होने के कारण पीईटी की तैयारियों में लग गए।पीईटी परीक्षा में अच्छे अंक अर्जित करने पर इनका चयन गोविंदराम सक्सेरिया प्रौद्योगिकी संस्थान , इंदौर में हुआ।

बीई की परीक्षा में सर्वोच्च अंक भी प्राप्त किए। उच्च शिक्षा प्राप्त करने की चाह और आगे बढ़ने की लगन ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय इंजीनियरिंग कालेज रुड़की उत्तराखण्ड में एम टेक करने चले गए। शिक्षा अर्जित करते-करते ही इनका कैम्पस प्लेसमेंट में एनटीपीसी, नई दिल्ली में सिविल इंजीनियर के पद पर हो गया। पहली पोस्टिंग एनटीपीसी मुख्यालय नोयडा दिल्ली मिला इंजीनियर सत्यनारायण सोनी की प्रतिभा को देखते हुए एनटीपीसी के मुख्यालय ने हाइड्रो पावर प्लांट स्थापित करने के लिए मनेरी उत्तराखंड में नियुक्त किया ।
इस दौरान अपने कार्यों और सेवाओं के फलस्वरूप अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब रहे। उनके आत्मीयतापूर्ण व्यवहार , अधिकारियों और कर्मचारियों से सामंजस्य स्थापित करते हुए लोग बहुत प्रभावित होते रहें । हालांकि उत्तराखण्ड में जन-विरोध के चलते करोड़ों रुपए इन्वेस्टमेंट प्लान करने के बाद केन्द्र सरकार को प्लान को वापस लेना पड़ा। ऐसी स्थिति में इन्हें पुनः एनटीपीसी , दिल्ली के मुख्यालय में वापस बुलाया गया ।

बचपन से ही मेघावी छात्र सत्यनारायण सोनी आदर्श शिक्षक घनश्याम लाल सोनी , व्याख्याता शासकीय गट्टानी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, जांजगीर के सुपुत्र हैं । शिक्षा ही नहीं बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों में भी बचपन से ही रुचि रखने वाले सत्यनारायण आए दिन निर्धन, अक्षम पीड़ित मानवता की सेवा / सहायता में सदैव तत्पर रहते रहे हैं । इनके पिता घनश्याम लाल सोनी ने भी सेवानिवृत्ति के बाद विघार्थियों को निःशुल्क अपने उत्कृष्ट शैक्षणिक अनुभव से नवाचार की शिक्षा प्रदान करते रहे साथ ही कुछ वर्षों तक सरस्वती शिशु मंदिर , चांपा में अवैतनिक रुप में अपनी सेवाएं दी ।
पिता के उच्च संस्कारों का प्रभाव पुत्र पर भी पड़ता रहा ।इन्होंने आध्यात्मिक की ओर भी अपना कदम बढ़ाया और कुछ दिनों तक सेवा देने के लिए शांतिकुंज , हरिद्वार में भी गये ।अत्यंत सरल सहृदयी , मृदुभाषी , सर्वजन हितैषी नेकदिल सत्यनारायण सोनी”” सर्वे भवन्तु सुखिन: , सर्वे संतु निरामया: “”” में विश्वास रखते हुए अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। युक्तललाट ओजतेज से परिपूर्ण स्वामी विवेकानंद जी की तरह इनका भी आचरण, आहार, विहार हैं।

सबसे बड़ी बात यह है कि विवेकानंदजी के अवतरण दिवस पर उनका भी जन्मदिवस हैं । स्वामी विवेकानंद को अपना प्रेरणापुंज मानने वाले सत्यनारायण सोनी की वाणी में सौम्यता , बौध्दिकता और ज्ञान का अद्भुत भंडार भरा हुआ हैं । इनके एक जीजाश्री डॉ शांति कुमार सोनी, होम्योपैथिक चिकित्सक हैं तो वही छोटे जीजाश्री शशिभूषण सोनी शासकीय महाविद्यालय – चांपा में वाणिज्य विषय पर सहायक प्राध्यापक रह चुके हैं । इनकी अर्धांगिनी सुमन सोनी नर्सिंग कॉलेज में शिक्षा अर्जित कर दीन-दुखियों की सेवा करती लोगों को निःशुल्क दवाईयां भी देती रहती हैं । संकल्प के धनी , सिध्दातों पर अडिग , मानवता की सेवा में सदैव तत्पर सोनी परिवार अनेक दायित्वों को सफलतापूर्वक निर्वहन कर रहे हैं । इनकी विचारधारा और विरासत घनश्याम सोनी जैसे सद्चरित्र शिक्षक की विरासत पूंजी हैं ।

छोटी-छोटी प्रेरक बातों के जरिए लोगों को प्रभावित कर मार्गदर्शन करने वाले अद्भुत विलक्षण क्षमता के धनी इंसान हैं सोनीजी। शशिभूषण सोनी ने बताया कि एनटीपीसी सीपत बिलासपुर में कार्यरत रहते हुए सत्यनारायण सोनी ने गत माह स्वर्णकार समाज के आर्थिक कमजोर परिवार के कन्याओं के वैवाहिक संस्कारों में सहयोग पिछले चालिस दिनों से रामकृष्ण केयर हास्पिटल , रायपुर में जीवन-मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही प्रियवंदा सोनी को आर्थिक सहयोग देने में अग्रणी रहें । उच्च शिक्षा प्राप्त करने और बड़े महानगरों में निवास करने के बाद भी सत्यनारायण निच्छल आत्मीय भाव रखने वाले सबके आदर्श बने हुए हैं । ईश्वर आपको उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घ जीवन प्रदान करे । युवकों के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद के नाम को सार्थक मां भारती के चरणों में सुवासित सुगंध की तरह फैलती रहे।