
कौशल पांडे सूरजपुर टीवी 36 हिंदुस्तान
छत्तीसगढ: – आज छेरछेरा पर्व है। छेरछेरा पर्व छत्तीसगढ़ में बड़े ही धूमधाम और हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इसे छेरछेरा पुन्नी या छेरछेरा तिहार भी कहते हैं। इसे दान करने का पर्व माना जाता है। इस दिन छत्तीसगढ़ में युवक-युवती और बच्चे, सभी छेरछेरा (अनाज) मांगने घर-घर जाते हैं। छत्तीसगढ़ में छेरछेरा पुन्नी का अलग ही महत्व है।
वर्षों से मनाया जाने वाला ये पारंपरिक लोक पर्व साल के शुरुआत में मनाया जाता है। इस दिन रुपये पैसे नहीं बल्कि अन्न का दान करते हैं।
छेरछेरा धान का कटोरा
माई कोठी के धान ला हेर हेरा… छेरछेरा पर बच्चे गली-मोहल्लों, घरों में जाकर छेरछेरा (दान) मांगते हैं। दान लेते समय बच्चे ‘छेर छेरा… माई कोठी के धान ला हेर हेरा’ कहते हैं और जब तक आप अन्न दान नहीं देंगे तब तक वे कहते रहेंगे- ‘अरन बरन कोदो करन, जब्भे देबे तब्भे टरन’। इसका मतलब ये होता है कि बच्चे आपसे कह रहे हैं, मां दान दो, जब तक दान नहीं दोगे तब तक हम नहीं जाएंगे।
शाकंभरी देवी हुई थी प्रकटनश्रुति के अनुसार
एक समय धरती पर घोर अकाल पड़ा। इससे इंसान के साथ जीव-जंतुओं में भी हाहाकार मच गया। तब आदीशक्ति देवी शाकंभरी को पुकारा गया। जिसके बाद देवी प्रकट हुईं और फल, फूल, अनाज का भंडार दे दिया। जिससे सभी की तकलिफें दूर हो गई। इसके बाद से ही छेरछेरा मनाए जाने की बात कही जाती है।